मध्यप्रदेश सरकार सिंहस्थ 2028 को विश्वस्तरीय बनाने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। इसी क्रम में मोहन यादव ने उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में होने वाला सिंहस्थ महापर्व दुनिया को सनातन संस्कृति का भव्य स्वरूप दिखाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाओं के साथ आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के अंतर्गत एक करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित हेलीपैड विश्राम गृह का लोकार्पण किया। यह विश्राम गृह आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है, जिसमें कार्यालय कक्ष, आमजन से भेंट के लिए हॉल और पायलट के लिए अलग कक्ष बनाए गए हैं। यह सुविधा विशेष रूप से सिंहस्थ के दौरान आने वाले विशिष्ट अतिथियों, जनप्रतिनिधियों और आम श्रद्धालुओं के स्वागत और समन्वय के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। हेलीपैड और विश्राम गृह के निर्माण से उज्जैन में वीआईपी मूवमेंट और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को और अधिक सुव्यवस्थित किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिकता का वैश्विक मंच है। ऐसे में राज्य सरकार हर पहलू पर ध्यान दे रही है, ताकि आयोजन भव्य, सुव्यवस्थित और यादगार बने। उन्होंने बताया कि इस बार सिंहस्थ को “ग्रीन एंड क्लीन” थीम पर आयोजित किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को विशेष प्राथमिकता दी जा सके।
इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री ने नगर निगम को 2.25 करोड़ रुपये की लागत की इलेक्ट्रिक व्हील लोडर मशीन की चाबी सौंपी। यह मशीन पूरी तरह बैटरी संचालित है और शून्य उत्सर्जन के साथ कार्य करती है। इस पहल का उद्देश्य बड़े स्तर पर आने वाले श्रद्धालुओं के बीच स्वच्छता बनाए रखना और प्रदूषण को नियंत्रित करना है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से न केवल सफाई व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने उज्जैन प्रवास के दौरान धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में भी भाग लिया। उन्होंने चिमनगंज कृषि उपज मंडी में जाकर जैन संत जिनेन्द्र जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान जैन समाज के लोगों ने उनका स्वागत किया। संत जिनेन्द्र जी महाराज स्थानकवासी परंपरा के प्रमुख संत हैं और उनका आशीर्वाद लेना मुख्यमंत्री के लिए आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते हुए उनकी प्रतिमा पर पूजन-अर्चन किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर ब्राह्मण समाज द्वारा उनका सम्मान भी किया गया। इस तरह धार्मिक आस्था और सामाजिक सहभागिता के बीच संतुलन बनाते हुए मुख्यमंत्री ने समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद स्थापित किया।
सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में कई आधारभूत संरचनाओं का विकास भी किया जा रहा है। हेलीपैड, सड़कें, यातायात व्यवस्था, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्य तेजी से प्रगति पर हैं। अनुमान है कि इस आयोजन में करोड़ों श्रद्धालु देश-विदेश से आएंगे, जिसके लिए प्रशासनिक तैयारियां अभी से की जा रही हैं। इन व्यवस्थाओं से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि उज्जैन को एक वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में भी पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि सिंहस्थ-2028 में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को बेहतर सुविधाएं मिलें और उन्हें एक दिव्य व सुखद अनुभव प्राप्त हो। इसके लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है और योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जा रहा है।
अंततः, यह कहा जा सकता है कि सिंहस्थ 2028 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर है। मोहन यादव के नेतृत्व में और नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश इस महापर्व को ऐतिहासिक और भव्य बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।