अविराज सिंह ने कन्यादान को श्रेष्ठ दान कहा !

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खुरई |मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र खुरई के मॉडल स्कूल में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन सामाजिक समरसता, सादगी और बेटियों के सम्मान का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया। इस अवसर पर युवा नेता अविराज सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन केवल विवाह संस्कार नहीं होते, बल्कि समाज में एकता, समानता और सहयोग की भावना को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण सामाजिक अभियान होते हैं।

उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में कन्या को साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है और उसका सम्मान एवं उचित परिवार को समर्पण एक अत्यंत पुण्यदायी कार्य है। अक्षय तृतीया जैसे पावन अवसर पर आयोजित यह सामूहिक विवाह समाज को नई दिशा प्रदान करता है, जहां शासन और समाज मिलकर बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखते हैं।

अविराज सिंह ने अपने उद्बोधन में अक्षय तृतीया के धार्मिक और पौराणिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह दिन भगवान परशुराम की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अधर्म का नाश किया और समाज में न्याय की स्थापना की। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम केवल एक योद्धा ही नहीं बल्कि वेदों के महान ज्ञाता भी थे, जिनका जीवन हमें यह सिखाता है कि शक्ति और ज्ञान का संतुलन ही सच्चे धर्म की पहचान है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसी पावन तिथि पर माता अन्नपूर्णा का प्राकट्य हुआ, जिन्होंने संसार को अन्न और सेवा का महत्व समझाया। भगवान शिव को भिक्षा देकर उन्होंने यह संदेश दिया कि अन्नदान सबसे बड़ा धर्म है और सेवा भाव ही जीवन का वास्तविक आधार है।

कार्यक्रम में अविराज सिंह ने परंपरा अनुसार वर-वधुओं के पैर पखारे और डोली उठाकर सामाजिक सहभागिता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि कन्यादान को शास्त्रों में महादान कहा गया है क्योंकि इसमें माता-पिता अपनी सबसे मूल्यवान संपत्ति को एक नए परिवार के भविष्य के लिए समर्पित करते हैं। यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि त्याग, संस्कार और विश्वास का प्रतीक है।

उन्होंने आगे कहा कि सामूहिक विवाह सम्मेलन आज के समय की आवश्यकता है, क्योंकि इससे समाज में अनावश्यक खर्चों पर रोक लगती है और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक राहत मिलती है। यह आयोजन जाति और वर्ग के भेदभाव को समाप्त कर सामाजिक एकता का संदेश देता है। उन्होंने इसे ‘समरसता का कुंभ’ बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अविराज सिंह ने महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्ज लेकर विवाह करना गरिमा को गिरवी रखने के समान है, जबकि सामूहिक विवाह सम्मान और सादगी का मार्ग है। उन्होंने कहा कि समाज को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए ताकि हर बेटी का विवाह बिना आर्थिक बोझ के सम्मानपूर्वक संपन्न हो सके।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे, जिनमें राहुल चौधरी, राजपाल सिंह, देशराज यादव, अजीत सिंह, बलराम यादव, इंद्राराज सिंह ठाकुर, नीतिराज पटेल, गणेश पटेल, सपना महेश विश्वकर्मा, विनोद राजहंस, मेहरबान अहिरवार, प्रवीण जैन, कमलेश राय, सौरभ नेम, आशीष पटेल, राम शास्त्री, सचिन असाटी, मनोज चौरसिया (एसडीएम), राजेश मेहतेले (सीएमओ), केपी यादव, विनोद राय, विशाल जैन एवं श्रीमती ऋतुराय सहित अनेक गणमान्य नागरिक शामिल रहे।

कार्यक्रम के दौरान सभी ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना को समाज में बदलाव लाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल बताया और इसे आगे भी निरंतर जारी रखने पर जोर दिया।

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