मध्य प्रदेश के सागर में शहर की जीवन रेखा मानी जाने वाली राजघाट जल परियोजना का रविवार को कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पेयजल की गुणवत्ता, आपूर्ति व्यवस्था और निगरानी प्रणाली का बारीकी से जायजा लिया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य शहरवासियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था को और बेहतर बनाना था।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने सबसे पहले परियोजना स्थल पर रखी लॉग बुक का अवलोकन किया और नियमित रूप से दर्ज किए जा रहे जल गुणवत्ता परीक्षण के रिकॉर्ड की जांच की। इसके बाद उन्होंने मौके पर ही जल नमूने की जांच कराई, जिसमें पानी का pH स्तर 7.30 पाया गया। यह स्तर निर्धारित मानकों के अनुरूप है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वर्तमान में जल की गुणवत्ता संतोषजनक है।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने नगर निगम कमिश्नर राजकुमार खत्री और अन्य संबंधित अधिकारियों से जल आपूर्ति की शुद्धता और वितरण प्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने परियोजना में कार्यरत केमिस्ट से भी बातचीत की और पानी की जांच प्रक्रिया, उपयोग किए जा रहे रसायनों तथा गुणवत्ता नियंत्रण के उपायों के बारे में विस्तार से समझा। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जल गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इसके अलावा उन्होंने क्लोरीन हाउस का निरीक्षण किया, जहां पानी को शुद्ध करने के लिए क्लोरीन का उपयोग किया जाता है। कलेक्टर ने यहां सुरक्षा मानकों और प्रक्रिया की स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने 5.7 एमएलडी क्षमता वाले फिल्टर हाउस का भी निरीक्षण किया, जहां स्थापित स्काडा (SCADA) सिस्टम के माध्यम से जल आपूर्ति की निगरानी की जाती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस निगरानी प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि जल आपूर्ति व्यवस्था में निरंतर निगरानी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कहीं भी पाइपलाइन में लीकेज या दूषित पानी की स्थिति न बनने पाए। यदि किसी भी क्षेत्र से शिकायत प्राप्त होती है, तो उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि राजघाट जल परियोजना के माध्यम से शहर के 48 वार्ड, मकरोनिया क्षेत्र के 18 वार्ड और छावनी क्षेत्र सहित लगभग 6 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। परियोजना की संग्रहण क्षमता 62.67 लाख घन मीटर है, जबकि फिल्टर हाउस की कुल क्षमता 88.20 एमएलडी है। इसके अलावा शहर में 8 ओवरहेड टैंक और लगभग 430 किलोमीटर लंबा पाइपलाइन नेटवर्क स्थापित है, जिसके माध्यम से जल का वितरण किया जाता है।
परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड के पास है, जो जल आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने में अहम भूमिका निभा रही है। कलेक्टर ने कंपनी के कार्यों की समीक्षा करते हुए गुणवत्ता और समयबद्धता बनाए रखने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने शहर के विकास से जुड़े अन्य कार्यों का भी जायजा लिया। उन्होंने नए आरटीओ कार्यालय के पास प्रस्तावित बस स्टैंड स्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि भविष्य में यातायात व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सके।
कुल मिलाकर, यह निरीक्षण शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कलेक्टर के इस दौरे से यह स्पष्ट संदेश गया है कि प्रशासन नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं बेहतर ढंग से उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।