एमपी में खूंखार होते स्ट्रीट डॉग्स: गर्मी, भूख और लापरवाही बना रही बड़ा खतरा !

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मध्यप्रदेश में इन दिनों स्ट्रीट डॉग्स (आवारा कुत्तों) के हमले तेजी से बढ़ते नजर आ रहे हैं। हाल ही में सतना में सामने आया मामला इस समस्या की गंभीरता को उजागर करता है, जहां महज तीन घंटे में 40 लोगों को कुत्तों ने काट लिया। इसी तरह भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में भी डॉग बाइट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।


गर्मी बन रही आक्रामकता की सबसे बड़ी वजह

पशु विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के मौसम में कुत्तों का व्यवहार काफी बदल जाता है। कुत्तों के शरीर में इंसानों की तरह पसीना निकालने की क्षमता नहीं होती, जिससे वे अपने शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते। यही कारण है कि अप्रैल से जून के बीच उनमें चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ जाती है।

तेज धूप, पानी की कमी और भोजन की अनुपलब्धता उन्हें और ज्यादा अस्थिर बना देती है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति उनके पास जाता है या वे खुद को खतरे में महसूस करते हैं, तो हमला करने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।


शहरों में तेजी से बढ़ रहे डॉग बाइट केस

राजधानी भोपाल के अस्पतालों में रोजाना 50 से 60 नए डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं। वहीं 200 से ज्यादा लोग रोज एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन के लिए पहुंच रहे हैं।

इंदौर में अप्रैल महीने के पहले 24 दिनों में ही 3493 केस दर्ज हुए, यानी औसतन 146 मामले प्रतिदिन। यह आंकड़ा दिखाता है कि समस्या कितनी तेजी से बढ़ रही है।


सतना और मनावर में दहशत का माहौल

सतना में कुत्तों के हमले के बाद लोग जान बचाने के लिए दुकानों और घरों में छिपते नजर आए। जिला अस्पताल में अचानक एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी।

इसी तरह मनावर क्षेत्र में भी कुछ घंटों के भीतर 26 लोगों और 3 पशुओं पर हमला किया गया। लगातार हो रहे ऐसे हमलों से लोगों में डर का माहौल है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में।


प्रदेश में लाखों की संख्या में आवारा कुत्ते

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में 10 लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। इनमें से लगभग 6 लाख बड़े शहरों—इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर—में रहते हैं।

इतनी बड़ी संख्या में कुत्तों का खुले में घूमना और उनका नियंत्रण न होना, इस समस्या को और गंभीर बना रहा है।


रेबीज का खतरा भी बढ़ा

डॉग बाइट के साथ-साथ रेबीज जैसी खतरनाक बीमारी का खतरा भी बना रहता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2022 से जनवरी 2025 तक प्रदेश में 3.39 लाख से ज्यादा डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। इसी दौरान कम से कम 9 लोगों की रेबीज से मौत भी हुई है।

रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, जिसका समय पर इलाज न हो तो यह निश्चित रूप से मृत्यु का कारण बन सकती है।


लोगों की लापरवाही भी जिम्मेदार

कई मामलों में देखा गया है कि लोग कुत्तों को खाना तो देते हैं, लेकिन उनकी देखभाल या वैक्सीनेशन का ध्यान नहीं रखते। इससे कुत्ते उस क्षेत्र को अपना इलाका मानने लगते हैं और बाहरी लोगों पर हमला कर देते हैं।

इसके अलावा कचरे के ढेर, खुले में फेंका गया भोजन और नगर निगम की कमजोर व्यवस्था भी कुत्तों की संख्या बढ़ाने में योगदान दे रही है।


समाधान क्या हो सकते हैं?

इस बढ़ती समस्या से निपटने के लिए कई स्तर पर काम करने की जरूरत है:

  • नसबंदी (Sterilization) अभियान को तेज किया जाए
  • आवारा कुत्तों का रेगुलर वैक्सीनेशन सुनिश्चित किया जाए
  • शहरों में कचरा प्रबंधन को मजबूत किया जाए
  • लोगों को कुत्तों के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनाया जाए
  • गर्मी के समय कुत्तों के लिए पानी और छांव की व्यवस्था हो

मध्यप्रदेश में बढ़ते डॉग बाइट के मामले सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती बन चुके हैं। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

गर्मी, भूख, और अव्यवस्था—ये तीनों मिलकर स्ट्रीट डॉग्स को आक्रामक बना रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि सरकार, प्रशासन और आम जनता मिलकर इस समस्या का समाधान निकालें, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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