मध्यप्रदेश में प्रशासनिक हलकों में हलचल मचाने वाला जबलपुर स्मार्ट सिटी विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पहले जहां यह मामला आईएएस अधिकारी और मंत्री के बीच टकराव तक सीमित था, वहीं अब इसमें एक महिला कर्मचारी की एंट्री ने विवाद को और गंभीर बना दिया है। महिला कर्मचारी ने शपथ पत्र (एफिडेविट) देकर आईएएस अधिकारी पर अपमान और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि: IAS vs मंत्री
पूरा मामला अरविंद शाह और राकेश सिंह के बीच विवाद से शुरू हुआ था। IAS अधिकारी शाह ने मंत्री पर अपने साथ अभद्र व्यवहार और दबाव बनाने का आरोप लगाया था। इस मामले में आईएएस एसोसिएशन ने भी हस्तक्षेप करते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत की थी।
हालांकि बाद में मुख्यमंत्री स्तर पर हस्तक्षेप के बाद यह विवाद शांत होता नजर आया, लेकिन अब एक नया पक्ष सामने आने से मामला फिर गरमा गया है।

महिला कर्मचारी का आरोप: ‘तू दो कौड़ी की कर्मचारी’
स्मार्ट सिटी में कार्यरत प्रशासनिक कार्यकारी दिलप्रीत भल्ला ने शपथ पत्र में आरोप लगाया है कि CEO अरविंद शाह ने उनके साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
उनके अनुसार, जब उन्होंने अपने वेतन को लेकर सवाल किया, तो उन्हें कहा गया—
“तू दो कौड़ी की कर्मचारी है, मैं किसी मंत्री की नहीं सुनता।”
यह कथन न केवल कर्मचारी के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है, बल्कि प्रशासनिक आचरण पर भी सवाल खड़ा करता है।
वेतन रोकने से शुरू हुआ विवाद
दिलप्रीत भल्ला के मुताबिक, मार्च 2026 का उनका वेतन तय समय पर नहीं मिला। जब उन्होंने प्रशासनिक अधिकारी से जानकारी ली, तो बताया गया कि CEO के निर्देश पर वेतन रोका गया है।
इसके बाद जब वे सीधे CEO से मिलने पहुंचीं, तो वहां कथित रूप से उन्हें अपमानित किया गया और चैंबर से बाहर जाने के लिए कहा गया।
22 अप्रैल की घटना: मंत्री को भी दी चुनौती
शपथ पत्र में 22 अप्रैल की घटना को सबसे गंभीर बताया गया है। महिला कर्मचारी का दावा है कि जब राकेश सिंह के हस्तक्षेप के बाद उन्हें दोबारा बुलाया गया, तब CEO का व्यवहार और भी आक्रामक हो गया।
आरोप है कि इस दौरान शाह ने न केवल कर्मचारी को अपमानित किया, बल्कि मंत्री के लिए भी अपशब्द कहे और यहां तक कहा—“मैं मंत्री को भी देख लूंगा।”
यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला प्रशासनिक अनुशासन और मर्यादा का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
मंत्री आवास पर बैठक, लेकिन नहीं मिली माफी
घटना के बाद सिख समाज के प्रतिनिधियों ने मंत्री को जानकारी दी, जिसके बाद उनके आवास पर एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राघवेंद्र सिंह और रामप्रकाश अहिरवार भी मौजूद रहे।
मंत्री राकेश सिंह ने IAS अधिकारी को समझाइश दी कि एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में उन्हें महिला कर्मचारी के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए था।
बताया गया कि CEO ने यह स्वीकार किया कि उनकी भाषा गलत हो सकती है, लेकिन उन्होंने अपनी गलती के लिए औपचारिक माफी नहीं मांगी। इससे पीड़ित कर्मचारी खुद को आहत और असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

कानूनी कदम: एफिडेविट और शिकायत
महिला कर्मचारी ने 26 अप्रैल को नोटरी के समक्ष शपथ पत्र प्रस्तुत कर अपने आरोपों की पुष्टि की है। उन्होंने साफ कहा है कि यह शिकायत किसी दबाव या प्रलोभन में नहीं, बल्कि न्याय पाने के लिए की गई है।
शिकायत की प्रति जिला कलेक्टर को भी भेजी गई है और मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
यह पूरा घटनाक्रम कई गंभीर सवाल खड़े करता है—
- क्या वरिष्ठ अधिकारी अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं?
- क्या कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जा रहा है?
- क्या राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का असर निचले स्तर के कर्मचारियों पर पड़ रहा है?
बहुस्तरीय विवाद बना संवेदनशील मुद्दा
जबलपुर स्मार्ट सिटी का यह मामला अब तीन स्तरों पर विवाद बन चुका है—मंत्री vs IAS, IAS vs कर्मचारी, और प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल एक अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी का मामला होगा, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाएगा।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इस मामले में क्या कदम उठाती हैं, और क्या पीड़ित कर्मचारी को न्याय मिल पाता है या नहीं।