मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में NEET-UG 2026 परीक्षा से पहले प्रशासन द्वारा बरती जा रही सख्ती अब विवादों में घिर गई है। गांधी चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा 2 और 3 मई को मेडिकल छात्रों की छुट्टियां रद्द करने के आदेश के बाद जूनियर डॉक्टरों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह फैसला सभी छात्रों को संदेह की नजर से देखने जैसा है, जो उचित नहीं है।
दरअसल, NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित होने जा रही है। यह देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाती है, जिसमें हर साल लाखों छात्र शामिल होते हैं। परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इस बार प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं, लेकिन इन्हीं कदमों को लेकर अब असहमति भी सामने आ रही है।
गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन कार्यालय ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि 2 और 3 मई को किसी भी मेडिकल छात्र को अवकाश न दिया जाए। प्रशासन का मानना है कि छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करने से उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी और किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि को रोका जा सकेगा, खासकर सॉल्वर गैंग जैसे मामलों को ध्यान में रखते हुए।

हालांकि, इस निर्णय का विरोध करते हुए जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जूडा) के पदाधिकारियों ने इसे तर्कहीन बताया है। जूडा के उपाध्यक्ष डॉ. यशवीर गुर्जर का कहना है कि इस तरह के आदेश से यह संदेश जाता है कि सभी मेडिकल छात्र सॉल्वर गैंग से जुड़े हो सकते हैं, जो कि गलत धारणा है। उन्होंने कहा कि अधिकांश छात्र ईमानदारी से पढ़ाई करते हैं और इस तरह का सामूहिक प्रतिबंध उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है।
जूडा का कहना है कि वे परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए हर जरूरी कदम का समर्थन करते हैं, लेकिन उपाय संतुलित और वैज्ञानिक होने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बायोमेट्रिक स्कैनिंग, डिजिटल ट्रैकिंग और हाई-लेवल निगरानी प्रणाली जैसे तकनीकी उपाय ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं, बजाय इसके कि छात्रों को दो दिन तक “कैद” जैसा महसूस कराया जाए।
इधर, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। भोपाल में 3 मई को 33 परीक्षा केंद्रों पर दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षार्थियों को सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक ही केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा, इसके बाद किसी भी स्थिति में एंट्री नहीं मिलेगी।
परीक्षा को लेकर दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा से एक दिन पहले अपने केंद्र का निरीक्षण कर लें। साथ ही, एडमिट कार्ड पर दिए गए सभी निर्देशों का पालन अनिवार्य रूप से करें। परीक्षा केंद्र में किसी भी प्रकार की प्रतिबंधित सामग्री ले जाना पूरी तरह वर्जित रहेगा। हल्के कपड़े और सैंडल पहनकर आने की सलाह दी गई है, जबकि काला बॉल पेन केंद्र पर ही उपलब्ध कराया जाएगा।
इस सख्ती के पीछे पिछले वर्षों में सामने आए सॉल्वर गैंग के मामले भी बड़ी वजह हैं। खासतौर पर 2024 में हुए खुलासों ने पूरे सिस्टम को झकझोर दिया था, जब जांच में पाया गया कि कुछ एमबीबीएस छात्र पैसे लेकर अन्य अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दे रहे थे या प्रश्नपत्र हल कर रहे थे। इन मामलों में सीबीआई और दिल्ली पुलिस द्वारा कई गिरफ्तारियां भी की गई थीं।
इन्हीं घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष प्रशासन ने पहले से ज्यादा सख्ती बरतने का फैसला किया है। हालांकि, अब यही सख्ती विवाद का कारण बनती नजर आ रही है। एक ओर जहां प्रशासन इसे आवश्यक कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर मेडिकल छात्र और जूनियर डॉक्टर इसे अनुचित और असंतुलित मान रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह मामला सुरक्षा और स्वतंत्रता के बीच संतुलन का उदाहरण बन गया है। जहां परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है, वहीं छात्रों के अधिकारों और सम्मान का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।