सागर जिले से एक अत्यंत हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया है। देवरी के झुनकू वार्ड में एक 13 वर्षीय बालक की झूला झूलते समय हुई दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना न केवल एक परिवार की दुनिया उजाड़ गई, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक बालक देवांश उर्फ देव यादव रविवार को अपने घर के पास लगे पीपल के पेड़ की डाल पर रस्सी बांधकर झूला झूल रहा था। गर्मी के दिनों में बच्चे अक्सर इस तरह खुले स्थानों पर खेलते हैं, लेकिन इस बार यह खेल एक भयावह हादसे में बदल गया। बताया जा रहा है कि झूलते समय अचानक रस्सी का फंदा उसके गले में फंस गया, जिससे वह कुछ ही क्षणों में बेहोश हो गया।
जब परिजनों की नजर उस पर पड़ी, तो वे घबरा गए और तत्काल उसे बचाने की कोशिश की। आनन-फानन में उसे नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं पूरे मोहल्ले में सन्नाटा पसरा हुआ है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और मामले की जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में यह एक हादसा प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखते हुए विस्तृत जांच कर रही है, ताकि घटना की सटीक परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।

स्थानीय लोगों के अनुसार, देवांश अपने परिवार का इकलौता बेटा था। उसके पिता का कुछ वर्ष पूर्व ही निधन हो चुका था, जिसके बाद से वह अपनी मां का एकमात्र सहारा था। उसकी असमय मृत्यु ने परिवार को पूरी तरह से तोड़ दिया है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों का कहना है कि देवांश एक चंचल और हंसमुख स्वभाव का बच्चा था, जिसकी अचानक मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया है।
यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी भी है। अक्सर ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में बच्चे पेड़ों पर रस्सी बांधकर झूले बनाते हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते। बिना किसी सुरक्षा मानक के बने ऐसे झूले कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को इस तरह के अस्थायी और जोखिम भरे खेलों से दूर रखना चाहिए। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों पर नजर रखें और उन्हें सुरक्षित तरीके से खेलने के लिए प्रेरित करें।
इसके साथ ही, यह भी आवश्यक है कि स्थानीय प्रशासन और स्कूल स्तर पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाएं। बच्चों को खेलते समय सावधान रहने, जोखिम भरे तरीकों से बचने और सुरक्षित विकल्प अपनाने के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। यदि समय रहते ऐसी पहल की जाए, तो इस तरह के हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाकर बच्चों और अभिभावकों को सुरक्षा के प्रति सजग किया जाए। साथ ही, सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित खेल उपकरणों की व्यवस्था भी की जाए, ताकि बच्चे सुरक्षित वातावरण में खेल सकें।
कुल मिलाकर, देवरी के झुनकू वार्ड में हुई यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर संदेश भी है। बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि हम समय रहते सतर्क नहीं हुए, तो इस तरह की दुखद घटनाएं भविष्य में भी सामने आती रहेंगी।