सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में 108 एंबुलेंस सेवा में कार्यरत एक अनुभवी ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन) ने मंगलवार रात को अपने ही घर की छत पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान पुष्पेंद्र सिंह ठाकुर उर्फ सावन (40 वर्ष) के रूप में हुई है। वे लक्ष्मी वार्ड, देवरी क्षेत्र के निवासी थे। परिजनों ने बताया कि वे सामान्य रूप से घर आए, खाना खाया और फिर अकेले छत पर चले गए। किसी को उनकी मंशा का अंदाजा नहीं था।
घटना बुधवार सुबह उजागर हुई जब मृतक का बेटा बिट्टू सामने वाली छत पर बैठकर खीर खा रहा था। उसकी नजर अपने घर की छत पर पड़ी तो वह स्तब्ध रह गया। पिता फंदे पर लटक रहे थे। बच्चे ने चीखते हुए घरवालों को सूचना दी। परिवार के सदस्य छत पर पहुंचे तो पुष्पेंद्र की सांसें थम चुकी थीं। तुरंत सूचना देने पर देवरी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को फंदे से उतारा, पंचनामा तैयार किया और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। बुधवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

पुलिस ने आत्महत्या का मामला दर्ज कर लिया है और कारणों की गहन जांच शुरू कर दी है। अभी तक किसी सुसाइड नोट या स्पष्ट कारण का पता नहीं चला है। परिजनों का कहना है कि पुष्पेंद्र पिछले कुछ दिनों से चुपचाप रहने लगे थे, लेकिन उन्होंने किसी से कोई शिकायत या मानसिक तनाव नहीं बताया था।
पुष्पेंद्र ठाकुर पिछले कई वर्षों से 108 एंबुलेंस सेवा में ईएमटी के पद पर कार्यरत थे। उनकी ड्यूटी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगती थी। दिन-रात इमरजेंसी कॉल्स पर पहुंचना, गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाना, दुर्घटनाओं के शिकार लोगों को प्राथमिक उपचार देना—यह उनका रोज का काम था। इस पेशे में निरंतर तनाव, अनियमित ड्यूटी घंटे और भावनात्मक थकान आम बात है। कई स्वास्थ्यकर्मी लंबे समय तक ऐसे दबाव में काम करते रहते हैं, लेकिन मदद नहीं मांग पाते।
परिवार में उनकी पत्नी, बेटा बिट्टू और अन्य सदस्य शामिल हैं। पुष्पेंद्र घर के मुख्य कमाने वाले थे। उनके अचानक चले जाने से पूरा परिवार सदमे में है। परिजनों ने बताया, “वे मंगलवार को सामान्य रूप से घर आए। खाना खाया, बच्चों से बात की और फिर ऊपर छत पर चले गए। हमें कुछ भी संदेह नहीं हुआ। शाम ढल चुकी थी, अंधेरा हो गया था।”
आत्महत्या के संभावित कारण
पुलिस जांच के अनुसार, आर्थिक तंगी, पारिवारिक कलह, व्यावसायिक तनाव या कोई निजी समस्या हो सकती है। 108 एंबुलेंस स्टाफ अक्सर कम वेतन, ओवरटाइम की कमी और संसाधनों की कमी की शिकायत करते रहते हैं। लगातार गंभीर केस देखने से ‘सेकेंडरी ट्रॉमेटिक स्ट्रेस’ (दूसरे के दर्द को बार-बार महसूस करना) भी स्वास्थ्यकर्मियों में आम है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुष्पेंद्र सौम्य स्वभाव के व्यक्ति थे। वे अपने काम में समर्पित थे। देवरी क्षेत्र के कई लोग उन्हें अच्छे ईएमटी के रूप में जानते थे। एक पड़ोसी ने बताया, “वे कभी किसी से झगड़ा नहीं करते थे। लेकिन पिछले महीनों में उनकी बातचीत कम हो गई थी।”
यह घटना सागर जिले में हाल के वर्षों में हुई कई आत्महत्याओं की कड़ी है। स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों में मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे कर्मचारियों के लिए नियमित काउंसलिंग, स्ट्रेस मैनेजमेंट ट्रेनिंग और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस की जरूरत है।
मध्य प्रदेश में 108 सेवा लाखों लोगों की जान बचाती है, लेकिन जो लोग यह सेवा देते हैं, उनकी अपनी जिंदगी अक्सर अनदेखी रह जाती है। पुष्पेंद्र जैसे कर्मचारी दिन भर दूसरों की जान बचाने में लगे रहते हैं, लेकिन खुद की मदद मांगने में असमर्थ हो जाते हैं।
देवरी थाना प्रभारी ने बताया कि शव का पंचनामा पूरा कर लिया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है। परिवार के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। यदि कोई बाहरी दबाव या उत्पीड़न सामने आता है तो कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आत्महत्या का मामला दर्ज है।
परिवार ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया है। पूरे इलाके में शोक का माहौल है। कई स्वास्थ्यकर्मी सहयोगियों के निधन पर दुख जता रहे हैं और बेहतर वर्किंग कंडीशंस की मांग कर रहे है
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लेना कितना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति लगातार उदास, चुप्पा या अलग-थलग रहने लगे तो उसे तुरंत मदद पहुंचानी चाहिए। हेल्पलाइन नंबर 9152987821 (iCall) या स्थानीय काउंसलिंग सेंटर से संपर्क किया जा सकता है।
पुष्पेंद्र ठाकुर की आत्महत्या न केवल एक परिवार की खुशियों को चूर कर गई है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के सामने एक चुनौती भी खड़ी कर गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद और तथ्य सामने आ सकते हैं।