मध्यप्रदेश में किसानों की समस्याओं को लेकर सियासत गरमा गई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गुरुवार, 7 मई को प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। इस दौरान आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे सहित कुल 7 प्रमुख स्थानों पर चक्काजाम किया जाएगा। इस आंदोलन का नेतृत्व वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा कर रहे हैं।
राजधानी भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीसी शर्मा ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश की गेहूं खरीदी व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है। बार-बार खरीदी की तारीख और स्लॉट बुकिंग बढ़ाने से सरकार की व्यवस्थाओं की कमजोरी उजागर हो गई है। उनका आरोप है कि इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है।
कांग्रेस के मुताबिक, खरीदी के शुरुआती 14 दिनों में केवल 9.30 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी हो पाई है, जो बेहद कम है। किसानों को स्लॉट बुकिंग में दिक्कत, पंजीयन पर्ची अपलोड करने में परेशानी और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में किसान परेशान होकर अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं।
इस आंदोलन का असर प्रदेश के 11 जिलों में देखने को मिल सकता है। करीब 747 किलोमीटर क्षेत्र में यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। खासतौर पर आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर जाम लगने से यात्रियों और परिवहन पर बड़ा असर पड़ सकता है। प्रशासन ने भी इसे देखते हुए सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
कांग्रेस ने खरीदी केंद्रों की अव्यवस्थाओं को लेकर भी सरकार को घेरा है। पार्टी का आरोप है कि अधिकांश केंद्रों पर किसानों के लिए बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। न पीने का पानी, न छाया की व्यवस्था, न बैठने की सुविधा और न ही शौचालय—ऐसे हालात में किसान कई दिनों तक अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ सड़कों पर इंतजार करने को मजबूर हैं।

स्थिति इतनी खराब बताई जा रही है कि किसान अपनी गेहूं की फसल 1800 से 2022 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं, जो कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी कम है। कांग्रेस का कहना है कि यह किसानों के साथ सीधा अन्याय है और सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
पार्टी ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। प्रमुख मांग यह है कि किसानों को गेहूं का उचित मूल्य 2625 रुपए प्रति क्विंटल दिया जाए। इसके अलावा जिन किसानों ने मजबूरी में कम दाम पर फसल बेची है, उन्हें भावांतर योजना के तहत अंतर राशि सीधे उनके बैंक खातों में दी जाए। साथ ही मूंग और सोयाबीन जैसी अन्य फसलों के दामों को लेकर भी स्पष्ट नीति बनाने की मांग की गई है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर है।
कुल मिलाकर, किसानों के मुद्दों को लेकर होने वाला यह चक्काजाम न केवल आम जनता की आवाजाही को प्रभावित करेगा, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज कर सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इस आंदोलन के बाद क्या कदम उठाती है और किसानों की समस्याओं का समाधान कैसे करती है।