पन्ना टाइगर रिजर्व के पास गांव में घुसा बाघ, गाय का किया शिकार, बछड़े को उठा ले गया !

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पन्ना टाइगर रिजर्व के पास गांव में घुसा बाघ, गाय का किया शिकार, बछड़े को उठा ले गया ! के बफर जोन से लगे गांवों में एक बार फिर बाघ की दस्तक ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार देर रात ग्राम पंचायत द्वारी के मोहनपुर हनुमतपुरा गांव में एक बाघ रिहायशी इलाके में घुस आया। बाघ ने गांव में बंधे मवेशियों पर हमला कर एक गाय को मार डाला, जबकि उसके बछड़े को अपने साथ जंगल की ओर ले गया। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक घटना देर रात की है, जब अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। अचानक मवेशियों के जोर-जोर से रंभाने और कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनकर लोग बाहर निकले। इसी दौरान गांव के लोगों ने बाघ को मवेशियों पर हमला करते देखा। बाघ ने पशुपालक रामशरण चंदपुरिया की पालतू गाय को अपना शिकार बना लिया। हमला इतना तेज था कि गाय की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद बाघ गाय के बछड़े को मुंह में दबाकर जंगल की ओर ले गया।

गांव निवासी मुकेश कुमार ने बताया कि बाघ अचानक गांव के बीचोंबीच पहुंच गया था। लोगों ने शोर मचाने की कोशिश की, लेकिन बाघ बिना डरे मवेशियों पर हमला करता रहा। घटना के बाद गांव के लोग बेहद भयभीत हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी कई बार बाघ और तेंदुए जंगल से निकलकर गांव के आसपास देखे गए हैं, लेकिन इस तरह रिहायशी इलाके में घुसकर हमला करने की घटना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

घटना की सूचना मिलते ही पन्ना टाइगर रिजर्व की टीम सक्रिय हो गई। वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी रात में ही गांव पहुंचे और मौके का निरीक्षण किया। पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर बी.के. पटेल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि बाघ शिकार करने के बाद वापस जंगल की ओर लौट गया है। उन्होंने कहा कि गांव में निगरानी बढ़ा दी गई है और रेस्क्यू टीम को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

वन विभाग की टीम ने घटनास्थल के आसपास बाघ के पगमार्क भी तलाशे हैं। अधिकारियों का मानना है कि बाघ भोजन की तलाश में जंगल से निकलकर गांव की ओर आया था। गर्मी के मौसम और जंगल के किनारे बसे गांवों में मवेशियों की मौजूदगी के कारण कई बार जंगली जानवर आबादी वाले इलाकों की ओर रुख कर लेते हैं।

घटना के बाद गांव में वन विभाग की ओर से मुनादी करवाई गई है। ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे रात के समय अकेले बाहर न निकलें और जंगल की ओर जाने से बचें। लोगों से कहा गया है कि वे अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर बांधकर रखें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत वन विभाग को दें।

वन विभाग के कर्मचारियों को गांव और आसपास के क्षेत्रों में तैनात किया गया है ताकि बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सतर्क रहने की अपील की है। साथ ही बच्चों और महिलाओं को अकेले बाहर न भेजने की सलाह भी दी गई है।

पीड़ित पशुपालक रामशरण चंदपुरिया ने बताया कि गाय उनके परिवार की आय का महत्वपूर्ण जरिया थी। अचानक हुए इस हमले से उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचा है। उन्होंने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से सटे गांवों में जंगली जानवरों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे लोगों की जान और मवेशियों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।

स्थानीय लोगों ने वन विभाग से गांव के आसपास नियमित गश्त बढ़ाने और सुरक्षा के स्थायी इंतजाम करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।

पन्ना टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में बाघ मौजूद हैं। बाघों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ अब उनका मूवमेंट बफर जोन और गांवों की ओर भी बढ़ने लगा है। इससे मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

फिलहाल वन विभाग पूरे इलाके पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत है। गांव में अभी भी डर और दहशत का माहौल बना हुआ है और लोग किसी अनहोनी की आशंका से चिंतित हैं।

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