पन्ना टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिजर्व क्षेत्र में एक बाघिन को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब पिछले एक महीने के भीतर दो बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने टाइगर रिजर्व की निगरानी व्यवस्था, गश्त और वन्यजीव सुरक्षा तंत्र पर चिंता बढ़ा दी है।
जानकारी के अनुसार यह हादसा 28 अप्रैल की रात पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में स्थित राजाबरिया-अमझिरिया मार्ग पर हुआ। बताया जा रहा है कि एक तेज रफ्तार बोलेरो वाहन ने सड़क किनारे मौजूद बाघिन को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाघिन उछलकर सड़क किनारे पत्थरों के बीच जा गिरी और गंभीर रूप से घायल हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन में हड़कंप मच गया। डिप्टी डायरेक्टर बी.के. पटेल ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि रेंजरों से सूचना मिलने के बाद अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे। रात में ही पैदल गश्त कर इलाके का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान बाघिन के शावकों की मौजूदगी भी सामने आई, जिससे अधिकारियों की चिंता और बढ़ गई।
वन विभाग के अनुसार अगले दिन हाथियों के दल, उड़नदस्ता टीम और विशेष निगरानी दल के साथ पूरे इलाके में दोबारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया। तलाशी के दौरान बाघिन के पगमार्क मिले, साथ ही उसके द्वारा किए गए शिकार के भी संकेत मिले हैं। इससे यह संभावना जताई जा रही है कि घायल होने के बावजूद बाघिन जीवित है और अपने शावकों के साथ क्षेत्र में घूम रही है।
फिलहाल वन विभाग ने बाघिन और उसके शावकों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी बढ़ा दी है। इलाके में कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, हाथियों के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है और वन अमले को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
हालांकि, इस घटना ने रिजर्व क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि कोर क्षेत्र में तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही लंबे समय से चिंता का विषय रही है। इसके बावजूद प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से वन्यजीवों की जान खतरे में पड़ रही है।
घटना के बाद अब वन विभाग अज्ञात वाहन की तलाश में जुट गया है। अधिकारियों ने आसपास के टोल नाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है ताकि टक्कर मारने वाले वाहन की पहचान की जा सके। माना जा रहा है कि हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया था।
गौरतलब है कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 5 मई को अमानगंज बफर क्षेत्र में करीब दो वर्षीय नर बाघ का शव मिला था। वहीं 21 अप्रैल को एक अन्य बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल बरामद हुआ था, जिसकी मौत कई सप्ताह पहले हो चुकी थी। लगातार हो रही इन घटनाओं ने पार्क प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इतना ही नहीं, 6 मई को पीटीआर क्षेत्र से एक अज्ञात वृद्ध व्यक्ति का कई दिन पुराना शव भी बरामद हुआ था। इन घटनाओं के बाद वन विभाग की गश्त व्यवस्था, रेडियो कॉलर मॉनिटरिंग और सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली को लेकर आलोचना बढ़ गई है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में वाहनों की गति नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। खासकर रात के समय वन्यजीव अक्सर सड़क किनारे या रास्तों को पार करते दिखाई देते हैं। ऐसे में तेज रफ्तार वाहन उनके लिए बड़ा खतरा बन जाते हैं।
स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों ने रिजर्व क्षेत्र में रात के समय वाहनों की आवाजाही सीमित करने, स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने और गश्त बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं सामने आ सकती हैं।
फिलहाल पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि बाघिन और उसके शावकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जल्द ही वाहन चालक की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।