बीना में जया किशोरी की कथा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब !

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सागर। बीना में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन प्रसिद्ध कथावाचिका जया किशोरी ने श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और राम राज्य की वास्तविक अवधारणा का संदेश दिया। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जहां जया किशोरी के प्रवचनों और भजनों ने भक्तिमय वातावरण बना दिया। कथा के दौरान युवाओं से विशेष रूप से धर्म और अध्यात्म से जुड़ने की अपील की गई।

अपने प्रवचन में जया किशोरी ने कहा कि आज अधिकांश लोग भक्ति को बुढ़ापे का विषय मानते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि युवावस्था में की गई भक्ति सबसे श्रेष्ठ होती है। उन्होंने कहा कि जब मन और शरीर दोनों ऊर्जावान हों, उसी समय व्यक्ति को भगवान और अध्यात्म की ओर बढ़ना चाहिए।

उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान कृष्ण ने गीता का ज्ञान युवा अर्जुन को दिया था, धृतराष्ट्र को नहीं। इसका अर्थ है कि युवा अवस्था ज्ञान प्राप्त करने और धर्म के मार्ग पर चलने के लिए सबसे उपयुक्त समय है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे शास्त्रों का अध्ययन करें और भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक परंपराओं को समझें।

जया किशोरी ने चिंता जताते हुए कहा कि आज के युवा धीरे-धीरे भक्ति और अध्यात्म से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और सोशल मीडिया, विशेष रूप से इंस्टाग्राम जैसी चीजों में अत्यधिक व्यस्तता के कारण युवा मानसिक रूप से अशांत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि युवा अपना थोड़ा समय भी भगवान और धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन को दें, तो उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा कलयुग में ज्ञान और आत्मिक शांति प्राप्त करने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है। भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक मार्ग है। उन्होंने युवाओं से कथा और सत्संग से जुड़ने का आग्रह करते हुए कहा कि यही जीवन को संतुलित और सफल बना सकता है।

कथा के दौरान जया किशोरी ने भक्ति और धन के संबंध पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि व्यक्ति धन और भक्ति दोनों को एक साथ सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं दे सकता। यदि मन पूरी तरह सांसारिक मोह-माया में उलझा रहेगा, तो सच्ची भक्ति संभव नहीं हो पाएगी। उन्होंने कहा कि भक्ति का पहला चरण भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण है।

राम राज्य की अवधारणा पर बोलते हुए जया किशोरी ने कहा कि आज हर व्यक्ति राम राज्य की बात करता है, लेकिन उसके वास्तविक अर्थ को बहुत कम लोग समझते हैं। उन्होंने कहा कि राम राज्य केवल एक राजनीतिक या सामाजिक व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की आदर्श पद्धति है।

उन्होंने कहा कि जब देश का प्रत्येक व्यक्ति भगवान राम के आदर्शों को अपने आचरण में उतार लेगा, तभी वास्तविक राम राज्य स्थापित होगा। सत्य, मर्यादा, करुणा, सेवा और धर्म का पालन ही राम राज्य की असली पहचान है।

जया किशोरी ने कहा कि कलयुग में भगवान को प्राप्त करने के दो प्रमुख मार्ग हैं—ज्ञान और भक्ति। उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्ञान स्वयं अहंकार नहीं है, लेकिन यदि व्यक्ति ज्ञान का उपयोग गलत तरीके से करे तो उसमें अहंकार उत्पन्न हो सकता है। वहीं सच्ची भक्ति व्यक्ति को विनम्र और शांत बनाती है।

कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। जया किशोरी के भजनों पर भक्त झूमते दिखाई दिए। कथा स्थल पर भक्ति और आध्यात्मिकता का अनूठा वातावरण बना रहा। विधायक निर्मला सप्रे सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक भी कथा में शामिल हुए।

बीना में चल रही श्रीमद् भागवत कथा लगातार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बड़ी संख्या में लोग कथा सुनने पहुंच रहे हैं। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। कथा के आगामी दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

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