लक्ष्य का सिर्फ 3 प्रतिशत काम, ई-अटेंडेंस में भी गड़बड़ी: सागर में सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी निलंबित !

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सागर। जिला प्रशासन ने शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है।  कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने कार्य में गंभीर लापरवाही, शासन के आदेशों की अवहेलना और ई-अटेंडेंस में अनियमितता पाए जाने पर सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी डॉ. रहीश खान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

यह कार्रवाई उस समय की गई जब प्रमुख सचिव, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में संबंधित अधिकारी का प्रदर्शन बेहद खराब पाया गया। विभागीय समीक्षा में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कृत्रिम गर्भाधान कार्य के लिए निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले डॉ. रहीश खान द्वारा केवल 3 प्रतिशत कार्य ही किया गया। इसे विभाग ने अत्यंत गंभीर लापरवाही माना।

विभागीय समीक्षा में खुली पोल

जानकारी के अनुसार 11 मई 2026 को प्रमुख सचिव, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, मध्यप्रदेश भोपाल द्वारा विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में जिलेवार कृत्रिम गर्भाधान कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।

समीक्षा के दौरान पशु चिकित्सालय दलपतपुर में पदस्थ सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी डॉ. रहीश खान का कार्य अत्यंत खराब पाया गया। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य करना था, लेकिन उन्होंने लक्ष्य का मात्र 3 प्रतिशत ही पूरा किया।

यह आंकड़ा सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारी के कार्यों की विस्तृत जांच कराई।

ई-अटेंडेंस में भी सामने आई अनियमितता

जांच के दौरान सिर्फ कार्य में कमी ही नहीं बल्कि ई-अटेंडेंस प्रणाली में भी गड़बड़ी पाई गई। विभाग द्वारा सार्थक एप पर दर्ज उपस्थिति का परीक्षण किया गया, जिसमें यह सामने आया कि 15 फरवरी 2026 से 10 मई 2026 के बीच कई बार अधिकारी ने संस्था की निर्धारित लोकेशन से अलग स्थानों से उपस्थिति दर्ज की।

इससे यह संदेह गहरा गया कि अधिकारी नियमित रूप से मुख्यालय में उपस्थित नहीं रह रहे थे। जब विभाग द्वारा इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया तो डॉ. रहीश खान कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं कर पाए।

पहले भी दी गई थी चेतावनी

उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, जिला सागर द्वारा प्रस्तुत नोटशीट दिनांक 11 मई 2026 में उल्लेख किया गया कि संबंधित अधिकारी को पूर्व में भी कई बार लक्ष्यानुसार कृत्रिम गर्भाधान कार्य करने के निर्देश दिए गए थे।

इसके बावजूद उनके कार्य में कोई सुधार नहीं हुआ और लगातार लापरवाही सामने आती रही। विभागीय अधिकारियों ने यह भी पाया कि वे प्रतिदिन मुख्यालय पशु चिकित्सालय दलपतपुर से सार्थक एप पर उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे थे।

जब उनसे अनुपस्थिति के संबंध में जवाब मांगा गया तो वे कोई उचित कारण प्रस्तुत नहीं कर सके। इससे यह स्पष्ट हो गया कि अधिकारी द्वारा अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरती जा रही थी।

शासन आदेशों की अवहेलना माना गया कृत्य

प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित अधिकारी ने शासन के निर्देशों की अनदेखी करते हुए स्वेच्छाचारिता दिखाई। विभागीय जांच में यह आचरण मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियमों के विपरीत पाया गया।

प्रशासन का मानना है कि पशुपालन विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग में कार्यरत अधिकारी द्वारा इस प्रकार की लापरवाही सीधे तौर पर शासन की योजनाओं और ग्रामीण पशुपालकों को प्रभावित करती है। कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम पशुधन विकास और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण योजना मानी जाती है। ऐसे में लक्ष्य के अनुरूप कार्य न करना विभागीय उद्देश्यों को प्रभावित करता है।

कलेक्टर ने की सख्त कार्रवाई

पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत डॉ. रहीश खान को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन लगातार विभागीय कार्यों की निगरानी कर रहा है और शासन की योजनाओं में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

कलेक्टर की इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को भी यह संदेश गया है कि शासकीय कार्यों में लापरवाही और अनुशासनहीनता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पशुपालन योजनाओं पर पड़ता है सीधा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से पशुधन की नस्ल सुधार, दूध उत्पादन में वृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा जाता है।

ऐसे में यदि मैदानी स्तर पर अधिकारी गंभीरता से कार्य न करें तो योजनाओं का लाभ सीधे तौर पर प्रभावित होता है। यही कारण है कि विभाग अब कार्य में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठा रहा है।

जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में भी विभागीय कार्यों की नियमित समीक्षा जारी रहेगी और लक्ष्य के अनुरूप कार्य नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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