दमोह जिले के पथरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत जेरठ गांव में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां संदिग्ध परिस्थितियों में दो चचेरे भाई-बहन की मौत हो गई। शुक्रवार को दोनों बच्चों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं एक महिला का निजी अस्पताल में इलाज जारी है। प्रारंभिक जानकारी में गेहूं में डाले गए कीटनाशक की गंध से तबीयत बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

मृत बच्चों की पहचान भावना लोधी उम्र 12 वर्ष एवं समीर लोधी उम्र 7 वर्ष के रूप में हुई है। दोनों आपस में चचेरे भाई-बहन बताए जा रहे हैं।
परिजनों के अनुसार शुक्रवार सुबह अचानक दोनों बच्चों को उल्टियां शुरू हुईं। शुरुआत में परिवार को सामान्य तबीयत खराब होने का अंदेशा हुआ, लेकिन कुछ ही समय में दोनों की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। इसके बाद घबराए परिजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया।

मृतक भावना के पिता दामोदर लोधी ने बताया कि परिवार जिस कमरे में सोता है, उसी कमरे में लगभग 80 बोरी गेहूं रखा हुआ था। करीब आठ दिन पहले गेहूं में कीटनाशक डाला गया था ताकि अनाज खराब न हो। उनका कहना है कि संभवतः उसी कीटनाशक की तेज गंध के कारण बच्चों की तबीयत बिगड़ी और यह हादसा हो गया।
उन्होंने बताया कि परिवार ने उस गेहूं का सेवन नहीं किया था। खाने के लिए पुराने गेहूं का उपयोग किया जा रहा था। ऐसे में परिजनों को आशंका है कि कमरे में लंबे समय तक कीटनाशक की गंध रहने के कारण जहरीला असर हुआ होगा।
दामोदर ने यह भी बताया कि उनकी पत्नी की तबीयत दो दिन पहले ही खराब हुई थी। वहीं उनके छोटे भाई डोमन के बेटे समीर की भी मौत हो चुकी है। समीर की मां की हालत खराब होने पर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।
घटना के बाद पूरे गांव में शोक और दहशत का माहौल है। ग्रामीणों के अनुसार परिवार साधारण किसान है और घर में बड़ी मात्रा में गेहूं रखा हुआ था। ग्रामीणों ने बताया कि अक्सर गांवों में अनाज को सुरक्षित रखने के लिए कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है, लेकिन पर्याप्त सावधानी नहीं बरती जाती।
जिला अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर बहादुर सिंह ने बताया कि दोनों बच्चों को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था, लेकिन जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि परिजनों ने गेहूं में कीटनाशक डालने की जानकारी दी है और प्राथमिक रूप से मामला फूड पॉइजनिंग या जहरीले प्रभाव का प्रतीत हो रहा है।

डॉक्टरों के अनुसार उल्टी और अचानक हालत बिगड़ना किसी विषैले पदार्थ के प्रभाव की ओर संकेत करता है। हालांकि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी गई। गोपाल सिंह ने बताया कि दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और मर्ग कायम कर जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गेहूं में किस प्रकार का कीटनाशक डाला गया था और उसका उपयोग सुरक्षित तरीके से किया गया था या नहीं। यदि लापरवाही सामने आती है तो मामले में आगे वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अनाज में उपयोग होने वाले कई कीटनाशक अत्यधिक जहरीले होते हैं और बंद कमरे में लंबे समय तक उनकी गंध रहने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण लोग अक्सर सुरक्षा उपायों की अनदेखी कर देते हैं, जिससे इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग को लेकर पर्याप्त जागरूकता क्यों नहीं है। फिलहाल पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजन गहरे सदमे में हैं।