इंदौर में चिकित्सा क्षेत्र ने एक और बड़ी सफलता दर्ज की है, जहां आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवार के 16 वर्षीय किशोर के दिल में मौजूद 27 एमएम के बड़े छेद का बिना ओपन हार्ट सर्जरी आधुनिक तकनीक से सफल इलाज किया गया। डॉक्टरों ने केवल 20 मिनट की इंटरवेंशनल प्रक्रिया में इस गंभीर जन्मजात हृदय दोष को बंद कर किशोर को नई जिंदगी दी।
यह जटिल इलाज Index Super Speciality Hospital में किया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने अत्याधुनिक कैथेटर आधारित तकनीक का उपयोग किया।
छह महीने से गंभीर लक्षण, लगातार बिगड़ती हालत
जानकारी के अनुसार, खंडवा क्षेत्र के पास स्थित एक गांव का 16 वर्षीय किशोर पिछले छह महीनों से लगातार स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था। शुरुआत में उसे हल्की थकान और सांस फूलने की शिकायत थी, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति गंभीर होती चली गई।
पिछले दो महीनों में उसकी हालत और बिगड़ गई थी। उसे बार-बार:
- तेज थकान
- सांस लेने में कठिनाई
- घबराहट और दिल की धड़कन तेज होना
- कमजोरी और चक्कर आना
- अचानक बेहोशी

जैसी समस्याएं होने लगी थीं। परिवार ने कई जगह इलाज की कोशिश की, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज जारी रखना मुश्किल हो रहा था।
जांच में सामने आया 27 एमएम का बड़ा एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट
15 मई को किशोर को इंदौर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां विस्तृत जांच के बाद पता चला कि उसके दिल में 27 एमएम का बड़ा छेद है। डॉक्टरों ने इसे ‘एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD)’ बताया।
इस बीमारी में दिल के ऊपरी दो कक्षों (एट्रिया) के बीच असामान्य छेद होता है, जिससे:
- ऑक्सीजन युक्त और अशुद्ध रक्त आपस में मिल जाते हैं
- शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है
- दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है
- समय के साथ हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ सकता है
डॉक्टरों के अनुसार, यदि समय पर इलाज न किया जाए तो यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
बिना ओपन हार्ट सर्जरी कैथेटर तकनीक से हुआ इलाज
पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सुदीप वर्मा के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने ओपन हार्ट सर्जरी की बजाय मिनिमली इनवेसिव इंटरवेंशनल तकनीक का चयन किया।
इस प्रक्रिया में:
- पैरों की नस (फेमोरल वेन) के माध्यम से कैथेटर डाला गया
- कैथेटर को धीरे-धीरे दिल तक पहुंचाया गया
- विशेष ASD डिवाइस (सेप्टल ऑक्लूडर) को सही स्थान पर स्थापित किया गया
- छेद को पूरी तरह बंद कर दिया गया
पूरी प्रक्रिया लगभग 20 मिनट में सफलतापूर्वक पूरी हो गई।

डॉक्टरों के अनुसार, यह तकनीक पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी की तुलना में अधिक सुरक्षित मानी जाती है क्योंकि इसमें:
- बड़ा चीरा नहीं लगता
- रक्तस्राव का खतरा कम होता है
- संक्रमण की संभावना बहुत कम होती है
- मरीज तेजी से रिकवर करता है
इलाज के बाद तेजी से सुधार, जल्द मिल सकता है डिस्चार्ज
इलाज के बाद किशोर की हालत में तेजी से सुधार देखा जा रहा है। डॉक्टरों ने बताया कि मरीज फिलहाल निगरानी में है और उसकी स्थिति स्थिर है। यदि सब कुछ सामान्य रहा तो उसे जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
परिजनों ने बताया कि इलाज के बाद बच्चे की सांस लेने की समस्या काफी हद तक कम हो गई है और वह पहले की तुलना में बेहतर महसूस कर रहा है।
आयुष्मान योजना बनी आर्थिक सहारा
इस पूरे इलाज का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि यह उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह मुफ्त किया गया। गरीब किसान परिवार के लिए यह राहत बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।
परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यह योजना और डॉक्टरों की तत्परता न होती तो इतने बड़े ऑपरेशन का खर्च उठाना उनके लिए असंभव था।
विशेषज्ञों की राय: बच्चों में दिल के छेद के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease) के मामलों में शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य लगते हैं, लेकिन समय के साथ स्थिति गंभीर हो सकती है।
प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
- जल्दी थक जाना
- सांस फूलना
- खेलकूद में रुचि कम होना
- वजन न बढ़ना
- बार-बार चक्कर आना या बेहोशी
- धड़कन तेज होना
डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत हृदय विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है, ताकि समय रहते इलाज किया जा सके।
आधुनिक चिकित्सा तकनीक से बढ़ी उम्मीदें
इस सफल केस ने यह साबित किया है कि आधुनिक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी तकनीक गंभीर हृदय रोगों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। बिना बड़े ऑपरेशन के भी अब जटिल बीमारियों का इलाज संभव हो रहा है, जिससे मरीजों को कम दर्द और जल्दी रिकवरी का लाभ मिल रहा है।
इंदौर की यह सफलता न केवल एक मरीज के जीवन की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही समय पर इलाज और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं जीवन बचाने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।