छतरपुर जिले के बिजावर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत लहर में तेंदूपत्ता फड़ संचालन को लेकर विवाद गहरा गया है। वन विभाग पर पक्षपात और एक विशेष फड़ संचालक को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने मंगलवार देर शाम बिजावर वन कार्यालय पहुंचकर जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने विभागीय कर्मचारियों पर लेन-देन और दबाव की राजनीति करने के गंभीर आरोप लगाए।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से गांव में दो तेंदूपत्ता फड़ संचालित होते रहे हैं, लेकिन अब वन विभाग के कुछ कर्मचारी मजदूरों और संग्राहकों को केवल एक ही फड़ पर तेंदूपत्ता जमा करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। विरोध करने वालों को धमकाने और परेशान करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
तेंदूपत्ता संग्रह को लेकर बढ़ा विवाद
ग्राम पंचायत लहर के ग्रामीणों के अनुसार गांव में लंबे समय से दो अलग-अलग तेंदूपत्ता फड़ संचालित किए जाते रहे हैं। इससे गांव के लोगों को सुविधा रहती थी और मजदूर अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी फड़ पर तेंदूपत्ता जमा कर पाते थे।
लेकिन इस बार स्थिति बदल गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के कुछ कर्मचारी एक विशेष फड़ संचालक को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से मजदूरों पर दबाव बना रहे हैं कि वे केवल उसी फड़ पर तेंदूपत्ता जमा करें।

ग्रामीणों का कहना है कि इससे न केवल दूसरे फड़ संचालकों को नुकसान हो रहा है, बल्कि मजदूरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
“विरोध करने पर धमकाया जा रहा”
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जो मजदूर या हितग्राही इस व्यवस्था का विरोध करते हैं, उन्हें धमकाया और परेशान किया जा रहा है।
उनका कहना है कि कई लोगों को यह चेतावनी दी गई कि यदि वे विभाग की बात नहीं मानेंगे तो उनका तेंदूपत्ता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे गांव में तनाव की स्थिति बन गई है।
ग्रामीणों ने वन विभाग के कुछ कर्मचारियों पर लेन-देन कर पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने के आरोप भी लगाए।
वन कार्यालय पहुंचकर किया प्रदर्शन
वन विभाग की कथित मनमानी से नाराज करीब दो दर्जन ग्रामीण मंगलवार शाम बिजावर वन कार्यालय पहुंच गए। वहां उन्होंने नारेबाजी करते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे न्याय की उम्मीद लेकर वन कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन कई घंटों तक किसी अधिकारी ने उनकी बात नहीं सुनी।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एसडीओ और रेंजर का आवास कार्यालय के पास ही स्थित है, इसके बावजूद वे उनसे मिलने नहीं आए। इससे ग्रामीणों में और नाराजगी बढ़ गई।
घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिली सुनवाई
ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने करीब दो से तीन घंटे तक वन कार्यालय परिसर में इंतजार किया। इस दौरान वे लगातार अधिकारियों से मिलने की मांग करते रहे, लेकिन कोई जिम्मेदार अधिकारी सामने नहीं आया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्होंने पहले भी कई बार शिकायतें की थीं, लेकिन हर बार उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया गया।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि प्रशासन उनकी बात समय रहते सुन लेता तो उन्हें प्रदर्शन करने की नौबत नहीं आती।
वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत के बाद पहुंचे रेंजर
जब ग्रामीणों ने मामले की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई, तब जाकर रेंजर Pawan Rai प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचे।
रेंजर के पहुंचने के बाद ग्रामीणों और वन विभाग के बीच तीखी बहस हुई। माहौल कुछ समय तक काफी गर्म बना रहा।
ग्रामीणों ने रेंजर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा और कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
निष्पक्ष जांच की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में वर्षों से दो फड़ संचालित हो रहे हैं तो अचानक एक फड़ को प्राथमिकता देने का क्या कारण है, इसकी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि मजदूरों को अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी फड़ पर तेंदूपत्ता जमा करने की स्वतंत्रता दी जाए।
विधायक भी उठा चुके हैं सवाल
गौरतलब है कि बिजावर क्षेत्र के विधायक Rajesh Shukla भी पहले वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा चुके हैं।
बताया जा रहा है कि विधायक ने रेंजर की कार्यशैली को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भी भेजी थी। ऐसे में यह नया विवाद विभाग की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के बावजूद स्थिति नहीं सुधर रही, तो यह प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
तेंदूपत्ता से जुड़ी है ग्रामीणों की आजीविका
बुंदेलखंड क्षेत्र में तेंदूपत्ता संग्रह ग्रामीणों और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आय का प्रमुख स्रोत माना जाता है। गर्मी के मौसम में बड़ी संख्या में ग्रामीण तेंदूपत्ता तोड़कर फड़ों पर जमा करते हैं, जिससे उन्हें मजदूरी मिलती है।
ऐसे में फड़ संचालन में किसी भी तरह की गड़बड़ी या पक्षपात सीधे तौर पर ग्रामीणों की आजीविका को प्रभावित करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष व्यवस्था नहीं रही तो गरीब मजदूरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन को और उग्र करेंगे।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे और जिला प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाएंगे।
फिलहाल पूरे मामले ने बिजावर क्षेत्र में वन विभाग की कार्यशैली और तेंदूपत्ता फड़ संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।