कलेक्टर प्रतिभा पाल की समीक्षा बैठक में उद्योगों के विस्तार, बिजली-पानी-सड़क और हवाई पट्टी विस्तार को लेकर दिए गए अहम निर्देश
सागर। सागर जिले को औद्योगिक दृष्टि से विकसित करने और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बड़े स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने उद्योग विभाग, एमपीआईडीसी एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि फर्नीचर क्लस्टर को शीघ्र विकसित कर विस्थापन की प्रक्रिया शुरू की जाए तथा उद्योगपतियों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में कलेक्टर ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र सिद्धगुवां में बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही सागर की हवाई पट्टी के विस्तार को लेकर भी प्रयासों को तेज करने के निर्देश दिए गए, ताकि भविष्य में बड़े निवेशकों को जिले की ओर आकर्षित किया जा सके।
बैठक में विभिन्न उद्योग संगठनों और विभागीय अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान उद्योगपतियों ने उद्योग संचालन में आ रही समस्याओं और आवश्यकताओं को प्रशासन के सामने रखा।

उद्योगपतियों की समस्याओं का होगा सूचीबद्ध निराकरण
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए विशेष प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने कहा कि निवेशकों और उद्योगपतियों को सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि जिले में नए उद्योग स्थापित हो सकें।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उद्योगपतियों की समस्याओं को सूचीबद्ध किया जाए। जिन समस्याओं का समाधान जिला स्तर पर संभव है, उन्हें तत्काल हल किया जाए, जबकि राज्य शासन स्तर की समस्याओं को शासन को भेजकर उनका निराकरण कराया जाए।
कलेक्टर ने बिजली विभाग को भी निर्देश दिए कि औद्योगिक क्षेत्रों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
जिले में विकसित होंगे तीन नए औद्योगिक क्षेत्र
बैठक में एमपीआईडीसी के प्रबंधक पी.के. उपाध्याय ने विभागीय गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि जिले में तीन नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की योजना बनाई गई है।
इनमें मसवासी ग्रांट (तहसील सागर), करमपुर (तहसील खुरई) और छेवला (तहसील देवरी) शामिल हैं।
मसवासी ग्रांट में बड़े निवेशकों की रुचि
औद्योगिक क्षेत्र मसवासी ग्रांट में 608.92 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर विकास कार्य किया जा रहा है। यहां बहुउत्पाद, वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की इकाइयों के लिए संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।
बैठक में बताया गया कि इस क्षेत्र में यूनिक सन पावर प्राइवेट लिमिटेड (सूरत), विवग्यो इनर्जी इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड (जोधपुर), ए.बी. फैब्रिक्स (लुधियाना), गोकुलदास एंड संस (भोपाल) और दावत राइस जैसे बड़े निवेशकों ने रुचि दिखाई है।
राज्य शासन द्वारा इस औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए विशेष रियायतें भी दी जा रही हैं। उद्योगों को 1 रुपये प्रति वर्गमीटर प्रीमियम, 1 रुपये प्रति वर्गमीटर लीज रेंट तथा विकास शुल्क 20 समान वार्षिक किश्तों में जमा करने की सुविधा दी गई है।
इसके अलावा 5 वर्षों तक विद्युत शुल्क में छूट तथा 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क की प्रतिपूर्ति का भी प्रावधान किया गया है।
भविष्य में इस क्षेत्र के विस्तार के लिए बेलखादर, कुढ़ई, कुडरी, बहेरिया साहनी और गढ़ोलीकला गांवों की 319.19 हेक्टेयर भूमि भी चिन्हित की गई है।

करमपुर और छेवला में भी औद्योगिक विकास की तैयारी
खुरई तहसील के करमपुर क्षेत्र में 60 हेक्टेयर भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। यहां सड़क और नाली निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। यह क्षेत्र कृषि उपकरण निर्माण और बहुउत्पाद इकाइयों के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
वहीं देवरी तहसील के ग्राम छेवला में 158.58 हेक्टेयर भूमि पर नया औद्योगिक क्षेत्र प्रस्तावित किया गया है।
बीना रिफाइनरी सहित कई बड़ी परियोजनाएं निर्माणाधीन
बैठक में बताया गया कि जिले में वर्तमान में दो बड़ी औद्योगिक इकाइयां निर्माणाधीन हैं। इनमें भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की बीना रिफाइनरी, जिसकी लागत लगभग 49 हजार करोड़ रुपये है, प्रमुख है।
इसके अलावा ग्राम सौरई, तहसील बंडा में मध्य भारत एग्रो प्रोडक्ट लिमिटेड की 435 करोड़ रुपये लागत वाली इकाई का विस्तार कार्य भी जारी है।
सिद्धगुवां और बीना में 133 उद्योग संचालित
जिले में वर्तमान में एमपीआईडीसी के दो विकसित औद्योगिक क्षेत्र सिद्धगुवां और आईआईडी बीना स्थापित हैं। इन क्षेत्रों में 188.24 करोड़ रुपये के निवेश से 133 उद्योग संचालित हो रहे हैं, जबकि 71.30 करोड़ रुपये की लागत से 69 नए उद्योग स्थापनााधीन हैं।
बैठक में जल संसाधन विभाग से मसवासी ग्रांट और करमपुर क्षेत्र के लिए जल आवंटन की आवश्यकता भी रखी गई। इस पर कलेक्टर ने विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि जल्द जल आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो सके।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने निर्देश दिए कि उद्योगों से जुड़ी समस्याओं और सुझावों की नियमित समीक्षा के लिए प्रत्येक तिमाही में इस प्रकार की बैठक आयोजित की जाए, जिससे उद्योगपतियों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो सके और जिले में औद्योगिक विकास को नई गति मिल सके।