सागर। पूर्व गृहमंत्री एवं वरिष्ठ विधायक भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि एक समय देश के लिए सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बन चुका नक्सलवाद आज समाप्ति की कगार पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में देश के लगभग 126 जिले नक्सल प्रभावित माने जाते थे और “रेड कॉरिडोर” का भय जंगलों से लेकर आदिवासी अंचलों तक फैला हुआ था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मजबूत इच्छाशक्ति, आक्रामक रणनीति और विकास आधारित नीति ने देश को “नक्सल मुक्त भारत” की दिशा में पहुंचा दिया है।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं था, बल्कि यह लोकतंत्र, विकास और देश की अखंडता के लिए गंभीर खतरा बन चुका था। कई क्षेत्रों में शासन का प्रभाव कमजोर पड़ गया था और विकास कार्य पूरी तरह बाधित हो चुके थे। हजारों जवान, पुलिसकर्मी और निर्दोष नागरिक नक्सली हिंसा का शिकार हुए। लेकिन पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने सुरक्षा और विकास को साथ लेकर जो रणनीति अपनाई, उसने हालात पूरी तरह बदल दिए।
भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट घोषणा की थी कि मार्च 2026 तक भारत को नक्सल मुक्त बना दिया जाएगा और अब यह लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि 18 मई 2026 को छत्तीसगढ़ के बस्तर में आयोजित 26वीं केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद की बैठक में अमित शाह ने ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि भारत लगभग पूर्ण रूप से नक्सल मुक्त हो चुका है। यह केवल सुरक्षा बलों की जीत नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और विकास आधारित शासन व्यवस्था की ऐतिहासिक विजय है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद को केवल सुरक्षा चुनौती नहीं माना, बल्कि इसे विकास, सुशासन और आदिवासी अधिकारों से जोड़कर देखा। इसी सोच को अमित शाह ने जमीन पर उतारा। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य सेवाएं, बैंकिंग सुविधाएं और शिक्षा का तेजी से विस्तार किया गया। सरकार ने सुरक्षा बलों को आधुनिक हथियार, तकनीक और मजबूत खुफिया नेटवर्क उपलब्ध कराए, जिससे नक्सली गतिविधियों पर निर्णायक प्रहार संभव हुआ।
भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2017 में लागू “समाधान” रणनीति नक्सलवाद के खिलाफ सबसे प्रभावी अभियान साबित हुई। इस रणनीति में स्मार्ट लीडरशिप, आक्रामक कार्रवाई, तकनीकी निगरानी, ड्रोन और उपग्रह आधारित मैपिंग, आधुनिक प्रशिक्षण, इंटेलिजेंस नेटवर्क और वित्तीय स्रोतों पर प्रहार जैसे कई आयाम शामिल थे। इससे पारंपरिक पुलिसिंग आधुनिक युद्धकला में बदल गई।
उन्होंने कहा कि लोकसभा में अमित शाह ने बताया था कि अभियानों को मजबूत करने और जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पिछले दस वर्षों में 68 नाइट-लैंडिंग हेलीपैड बनाए गए। इससे रात के समय नक्सलियों को मिलने वाला सामरिक लाभ समाप्त हो गया। इसके अलावा 400 बुलेट प्रूफ और ब्लास्ट-प्रूफ वाहन उपलब्ध कराए गए तथा घायल जवानों के लिए 5 अत्याधुनिक अस्पताल स्थापित किए गए।
भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार ने नक्सलियों के आर्थिक नेटवर्क को भी ध्वस्त किया। वर्ष 2016 में केंद्र और राज्य स्तर पर बहु-अनुशासनात्मक समूह बनाए गए जिन्होंने लेवी वसूली, अवैध फंडिंग और तथाकथित “अर्बन नक्सल” नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई की। परिणामस्वरूप नक्सली संगठन आर्थिक रूप से कमजोर पड़ गए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में छत्तीसगढ़ में चलाया गया “ऑपरेशन कगार” नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम निर्णायक प्रहार साबित हुआ। इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने 1,022 नक्सलियों को गिरफ्तार किया और 2,337 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। यह नक्सली संगठनों के तेजी से टूटते ढांचे का सबसे बड़ा प्रमाण है।
भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार ने आदिवासी समाज का विश्वास जीतने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। आदिवासी बच्चों के लिए 259 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्वीकृत किए गए, जिनमें से 179 संचालित हो चुके हैं। युवाओं को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ने के लिए 48 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान स्वीकृत किए गए, जिनमें 46 कार्यरत हैं। “बस्तर ओलंपिक” और “बस्तर पंडुम” जैसे आयोजनों के माध्यम से आदिवासी संस्कृति और अस्मिता को सम्मान दिया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार ने जंगलों के भीतर स्थापित 200 सुरक्षा शिविरों में से 70 को “वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरों” में बदलने का निर्णय लिया है, जहां अब सरकारी योजनाएं सीधे आदिवासी गांवों तक पहुंचाई जा रही हैं। जिन इलाकों में कभी चुनावों का बहिष्कार होता था, वहां आज लोकतंत्र का उत्सव दिखाई देता है। सड़कें, स्कूल, मोबाइल टावर और स्वास्थ्य सेवाएं अब दूरस्थ गांवों तक पहुंच चुकी हैं।
भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद खत्म करने का वैचारिक और विकास आधारित खाका तैयार किया, तो अमित शाह ने उसे कठोर रणनीति और मजबूत समन्वय के साथ धरातल पर लागू किया। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति और आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलते हैं, जब किसी गृह मंत्री ने सार्वजनिक समय-सीमा तय कर इतने बड़े उग्रवादी नेटवर्क को समय से पहले समाप्त कर दिखाया हो।
उन्होंने कहा कि आज जिन हाथों में कभी हथियार थे, उन्हीं हाथों में अब किताबें, लैपटॉप, खेल सामग्री और रोजगार के अवसर दिखाई दे रहे हैं। भारत अब नक्सलवाद के इस काले अध्याय को पीछे छोड़कर “विकसित भारत 2047” और “विकसित बस्तर 2031” की नई यात्रा की ओर बढ़ चुका है। यह केवल सुरक्षा की जीत नहीं, बल्कि लोकतंत्र, विकास, सुशासन और राष्ट्र की एकता की ऐतिहासिक विजय है।