सागर,
कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उर्वरक वितरण व्यवस्था और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित कृषि रथ शनिवार को सागर विकासखंड की नगर परिषद शाहपुर पहुंचा। यहां सरस्वती कुटी मंदिर परिसर में किसान चौपाल का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को रासायनिक उर्वरकों के वितरण हेतु शुरू की गई ई-टोकन प्रणाली, आधुनिक खेती की तकनीकों और प्राकृतिक कृषि के महत्व की विस्तार से जानकारी दी गई।
कृषि विभाग द्वारा आयोजित इस किसान चौपाल में किसानों को बताया गया कि अब खाद वितरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए “ई-विकास प्रणाली पोर्टल” और “बलराम ऐप” के माध्यम से ई-टोकन जारी किए जा रहे हैं। इसके जरिए किसान निर्धारित समय पर आसानी से खाद प्राप्त कर सकेंगे और उन्हें लंबी कतारों या अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी आर डी लडिया ने किसानों को उर्वरक वितरण की ई-टोकन प्रणाली के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने सरल भाषा में समझाया कि किसान किस प्रकार अपने मोबाइल फोन के माध्यम से ई-विकास पोर्टल या बलराम ऐप का उपयोग कर खाद के लिए ऑनलाइन टोकन बुक कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को समय पर और पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराना है ताकि बुवाई के समय किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।
उन्होंने किसानों को यह भी बताया कि डीएपी खाद की अत्यधिक निर्भरता से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसानों को डीएपी के विकल्प के रूप में टीएसपी, एनपीके और एसएसपी जैसे उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी गई। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी उर्वरक का उपयोग करने से पहले मृदा परीक्षण अवश्य कराया जाए, ताकि मिट्टी की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही खाद का उपयोग हो सके। इससे लागत कम होगी और उत्पादन में वृद्धि होगी।
किसान चौपाल में ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई के महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि गर्मी के मौसम में खेतों की गहरी जुताई करने से मिट्टी में छिपे कीट और खरपतवार नष्ट होते हैं तथा वर्षा का जल अधिक मात्रा में भूमि में समाहित होता है। इससे फसल उत्पादन में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को नरवाई प्रबंधन की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने किसानों से अपील की कि फसल कटाई के बाद खेतों में नरवाई जलाने के बजाय उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और पर्यावरण प्रदूषण भी कम होता है। किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों और तकनीकों की जानकारी देते हुए बताया गया कि उन्नत मशीनों के उपयोग से खेती की लागत कम और उत्पादन अधिक किया जा सकता है।
कृषि विभाग द्वारा जैविक और प्राकृतिक खेती को भी विशेष रूप से बढ़ावा दिया गया। किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया तथा प्राकृतिक खेती अपनाने के लाभ समझाए गए। अधिकारियों ने कहा कि जैविक खेती न केवल मिट्टी की सेहत सुधारती है बल्कि इससे उत्पादित फसलें स्वास्थ्य के लिए भी अधिक लाभकारी होती हैं।
कार्यक्रम में कृषि विस्तार अधिकारी कुलदीप क्रिश्चियन और राघवेंद्र सिंह ने भी किसानों को विभागीय योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को विभिन्न कृषि अनुदान योजनाओं, बीज वितरण, कृषि यंत्र सब्सिडी और फसल प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया।
कृषि विभाग का कहना है कि “कृषक कल्याण वर्ष 2026” के अंतर्गत जिलेभर में कृषि रथ के माध्यम से किसानों तक जागरूकता पहुंचाई जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना, आधुनिक खेती के प्रति जागरूक करना और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे खेत स्तर तक पहुंचाना है।
शाहपुर में आयोजित किसान चौपाल के दौरान किसानों ने भी कृषि अधिकारियों से खेती से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की और समाधान संबंधी सुझाव प्राप्त किए। ग्रामीण किसानों ने ई-टोकन प्रणाली को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और समय की बचत होगी।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य गांवों और कस्बों में भी कृषि रथ के माध्यम से इसी प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंच सके।