छतरपुर में खेत पर सो रहे युवक की गोली मारकर हत्या, 25 साल पुराने जमीनी विवाद ने ली जान !

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मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक बार फिर जमीनी विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के तिलवा गांव में मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात खेत पर सो रहे एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान 28 वर्षीय राजाराम कुशवाहा के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत और तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार तिलवा गांव में कुशवाहा परिवार का खेत और कुएं के पास ईंटों का भट्टा संचालित होता है। मंगलवार को भट्टे में पूजा-पाठ के बाद आग डाली गई थी। इसी कारण रात तक खेत पर परिवार के लोगों का आना-जाना लगा रहा। देर रात भोजन और अन्य कार्यक्रम खत्म होने के बाद परिवार के अधिकांश सदस्य घर लौट गए, लेकिन भट्टे की रखवाली के लिए राजाराम कुशवाहा और उसका मंझला भाई कीरथ कुशवाहा खेत पर ही रुक गए।

बताया जा रहा है कि दोनों भाई खेत पर सो रहे थे, तभी रात करीब 12 बजे आधा दर्जन हथियारबंद बदमाश वहां पहुंचे। हमलावरों ने अचानक दोनों भाइयों पर हमला कर दिया। जैसे ही कीरथ ने आरोपियों को देखा, वह जान बचाकर मौके से भाग निकला। इसी दौरान आरोपियों ने राजाराम को निशाना बनाते हुए उसकी कनपटी पर गोली मार दी। गोली सिर के आर-पार निकल गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद कीरथ ने भागकर परिवार के अन्य सदस्यों को पूरी जानकारी दी। परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक राजाराम की मौत हो चुकी थी। सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।

मृतक के भाई वालादीन कुशवाहा ने हत्या के पीछे पुराने पारिवारिक और जमीनी विवाद को वजह बताया है। परिजनों का आरोप है कि हत्या करने वाले लोग उनके ही रिश्तेदार हैं। वालादीन ने चिंता, साधु, नंदी, धनी और अरविंद यादव सहित अन्य लोगों पर हत्या का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दोनों परिवारों के बीच करीब 25 साल से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। इस विवाद को लेकर पहले भी कई बार झगड़े और मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं।

परिजनों के मुताबिक करीब 10 साल पहले भी इसी जमीन विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। हालांकि उस समय मामला शांत हो गया था, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। गांव के लोगों का कहना है कि दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ था और कई बार पंचायत स्तर पर समझौते की कोशिश भी हुई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका।

राजाराम कुशवाहा मजदूरी का काम करता था और राजस्थान के झुंझुनूं में रहकर परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। करीब 15 दिन पहले ही वह गांव लौटा था। उसकी पत्नी और तीन बेटियां राजस्थान में रहती हैं, जबकि दो बेटियां गांव में थीं। अचानक हुई इस वारदात के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि जमीनी विवादों को समय रहते सुलझाया नहीं जाए तो वे अक्सर हिंसक रूप ले लेते हैं। तिलवा गांव की यह घटना भी इसी का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है, जहां वर्षों पुरानी रंजिश ने एक परिवार की खुशियां उजाड़ दीं।

फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। वहीं गांव में शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।

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