छतरपुर जिले के महाराजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम टटम में बुधवार शाम एक एंबुलेंस चालक की गंभीर लापरवाही सामने आई, जिसने पूरे गांव में हड़कंप और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया। घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम टटम निवासी जानकी प्रजापति अपनी पत्नी की डिलीवरी के बाद जिला अस्पताल से एंबुलेंस (नंबर CG 04 NY 1544) के माध्यम से बुधवार शाम करीब 5:30 बजे अपने गांव लौटे थे। मरीज को सुरक्षित घर पर उतारने के बाद जब एंबुलेंस चालक वापस लौट रहा था, तभी उसने लापरवाही दिखाते हुए वाहन को सड़क किनारे बनी रैंपनुमा सीढ़ियों (जीने) पर चढ़ा दिया।
यह घटना गांव के बीच सड़क पर हुई, जहां अचानक एंबुलेंस को सीढ़ियों पर चढ़ते देख लोग दंग रह गए। ग्रामीणों का कहना है कि यह न केवल गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार था बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता था। वाहन भारी होने के कारण सीढ़ियों और आसपास की संरचना को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है।
घटना के दौरान मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने चालक को ऐसा करने से रोका और तुरंत विरोध जताया, लेकिन आरोप है कि चालक ने किसी की बात नहीं मानी और एंबुलेंस को उसी स्थिति में आगे निकाल ले गया। इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग डर गए कि कहीं कोई हादसा न हो जाए।

ग्रामीणों के अनुसार, यदि उस समय कोई व्यक्ति सीढ़ियों के पास मौजूद होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहन से इस तरह की लापरवाही को उन्होंने बेहद गंभीर मामला बताया है। लोगों का कहना है कि सरकारी वाहनों का इस तरह दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित एंबुलेंस चालक के खिलाफ तुरंत जांच कर कार्रवाई की जाए और उसे सेवा से हटाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि एंबुलेंस जैसी सेवाएं मरीजों की जान बचाने के लिए होती हैं, लेकिन यदि चालक ही लापरवाह हो जाए तो यह व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की है कि सभी एंबुलेंस चालकों को सख्त प्रशिक्षण और नियमों के पालन की अनिवार्यता सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल मामले की जानकारी स्थानीय प्रशासन तक पहुंच चुकी है और जांच की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कार्रवाई नहीं होती, वे इस मुद्दे को उठाते रहेंगे। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी सेवा वाहनों की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।