भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद तबादलों का दौर सोमवार 1 जून से शुरू हो गया है। राज्य सरकार की नई तबादला नीति-2026 के तहत 15 जून तक सभी विभाग स्वैच्छिक और प्रशासनिक आधार पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों के स्थानांतरण कर सकेंगे। सरकार द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी विभागों को ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से स्थानांतरण आदेश जारी करने होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार की कैबिनेट ने 20 मई को तबादला नीति को मंजूरी दी थी, जिसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने 22 मई को नीति जारी कर विभागों को आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए थे। अब प्रदेशभर में विभागीय स्तर पर तबादलों की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
पुलिस विभाग में भी शुरू हुई कवायद
प्रदेश में तबादलों की प्रक्रिया शुरू होते ही पुलिस विभाग ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) द्वारा 5 जून तक आरक्षक से लेकर उपनिरीक्षक (एसआई) स्तर तक के कर्मचारियों के स्थानांतरण की कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद विभिन्न जिलों में पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों ने तबादला सूची तैयार करना शुरू कर दिया है।

वहीं शिक्षा विभाग सहित कई अन्य विभागों ने भी जिलों में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों का अद्यतन विवरण मांगा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने संविदा कर्मचारियों एवं अधिकारियों से 2 जून तक ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करने को कहा है।
कर्मचारियों की संख्या के आधार पर होंगे तबादले
नई तबादला नीति में विभागों की कर्मचारी संख्या के आधार पर स्थानांतरण की सीमा तय की गई है।
- जिन विभागों में 200 तक कर्मचारी हैं, वहां अधिकतम 20 प्रतिशत तबादले किए जा सकेंगे।
- 200 से 1000 कर्मचारियों वाले विभागों में 15 प्रतिशत तक तबादले होंगे।
- 1000 से 2000 कर्मचारियों वाले विभागों में 10 प्रतिशत तक स्थानांतरण किए जाएंगे।
- 2001 से अधिक कर्मचारियों वाले विभागों में अधिकतम 5 प्रतिशत तबादलों की अनुमति होगी।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानांतरण प्रक्रिया व्यवस्थित रहे और विभागीय कार्य प्रभावित न हो।
तीन साल का कार्यकाल, लेकिन अनिवार्य नहीं
नई नीति के अनुसार प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कार्यपालिक अधिकारियों को एक जिले में तीन वर्ष पूरे होने पर जिले से बाहर स्थानांतरित किया जा सकता है। इसी प्रकार तृतीय श्रेणी कर्मचारियों का भी एक स्थान पर तीन वर्ष या उससे अधिक समय पूरा होने पर तबादला किया जा सकेगा।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि तीन वर्ष की अवधि तबादले की अनिवार्य शर्त नहीं होगी। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने में विफल रहा है या उसके कार्य प्रदर्शन पर प्रश्नचिह्न हैं, तो उसका तबादला तीन वर्ष से पहले भी किया जा सकता है।
महिलाओं को विशेष राहत
नई नीति में महिला कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को उनके गृह जिले में पदस्थ करने का प्रयास किया जाएगा।
इसके अलावा पति-पत्नी को एक ही स्थान पर पदस्थ करने के लिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। हालांकि अंतिम निर्णय प्रशासनिक आवश्यकता और उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर लिया जाएगा।
रिटायरमेंट के करीब कर्मचारियों को राहत
सरकार ने ऐसे कर्मचारियों को भी राहत दी है जिनकी सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय शेष है। सामान्य परिस्थितियों में ऐसे कर्मचारियों का तबादला नहीं किया जाएगा।
यह व्यवस्था कर्मचारियों को सेवा के अंतिम चरण में अनावश्यक परेशानियों से बचाने के उद्देश्य से की गई है।
कुछ मामलों को नीति से बाहर रखा गया
तबादला नीति में पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थ करने और गंभीर बीमारी से संबंधित मामलों में होने वाले स्थानांतरण को सामान्य तबादला प्रक्रिया से अलग रखा गया है। ऐसे मामलों पर विशेष परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
कर्मचारी संगठनों को भी राहत
मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को दो कार्यकाल यानी चार वर्ष तक स्थानांतरण से छूट दी गई है। हालांकि यह राहत केवल निर्धारित नियमों और मान्यता प्राप्त संगठनों के पदाधिकारियों को ही मिलेगी।
ऑनलाइन होंगे सभी आदेश
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी स्थानांतरण आदेश केवल ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। 15 जून के बाद जारी होने वाले सामान्य तबादला आदेश अमान्य माने जाएंगे और उनका पालन नहीं किया जाएगा।
प्रत्येक आदेश में कर्मचारी का ट्रेजरी उपयोग हेतु एम्पलाई कोड दर्ज करना अनिवार्य होगा। स्थानांतरण के बाद पुराने पदस्थापना स्थल से वेतन आहरण बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद यदि पुराने स्थान से वेतन निकाला जाता है तो उसे वित्तीय अनियमितता माना जाएगा।
जांच वाले अधिकारियों को कार्यपालिक पद नहीं
नई नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ नैतिक पतन से जुड़े आपराधिक मामले या विभागीय जांच लंबित हैं, उन्हें कार्यपालिक पदों पर पदस्थ नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा वित्तीय अनियमितता, गबन या सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों को तत्काल संबंधित पदों से हटाने की व्यवस्था भी की गई है।
15 जून तक रहेगा तबादलों का दौर
प्रदेश में 1 जून से शुरू हुई स्थानांतरण प्रक्रिया 15 जून तक चलेगी। इस अवधि में विभिन्न विभाग अपने प्रशासनिक और स्वैच्छिक तबादले पूर्ण करेंगे। इसके बाद जारी होने वाले सामान्य तबादला आदेश मान्य नहीं होंगे।
नई नीति के लागू होने के साथ ही प्रदेशभर में हजारों अधिकारी और कर्मचारी अपने स्थानांतरण आदेशों का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दो सप्ताह प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव लेकर आ सकते हैं।