सागर जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में स्कूल बस संचालकों एवं स्कूल प्रबंधन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देश पर आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता अपर कलेक्टर सागर ने की। बैठक का संचालन क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी द्वारा किया गया। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी एवं उप पुलिस अधीक्षक (यातायात) सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में स्कूली वाहनों की सुरक्षा, न्यायालयों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के पालन तथा बच्चों के सुरक्षित परिवहन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 15 जून तक सभी स्कूल बस संचालक एवं स्कूल प्रबंधन अपने वाहनों को मोटरयान अधिनियम एवं न्यायालयीन निर्देशों के अनुरूप तैयार कर लें, क्योंकि इसके बाद नियमित जांच अभियान चलाया जाएगा और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
अपर कलेक्टर ने सभी स्कूल बस संचालकों को निर्देशित किया कि वे मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करें। विशेष रूप से ऐसे वाहनों में जिनमें छात्राएं स्कूल आती-जाती हैं, वहां महिला अध्यापिका अथवा महिला अटेंडर की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने माननीय उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के निर्देशों के आधार पर जारी परिपत्र की जानकारी देते हुए स्कूल बस संचालकों, स्कूल प्रबंधन, अभिभावकों तथा जिला प्रशासन की जिम्मेदारियों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि सभी स्कूल बसों का रंग पीला होना चाहिए तथा बस के आगे और पीछे बड़े एवं स्पष्ट अक्षरों में “स्कूल बस” लिखा होना आवश्यक है। यदि वाहन किराये पर संचालित किया जा रहा है तो उस पर “ऑन स्कूल ड्यूटी” अंकित होना चाहिए।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी बस में निर्धारित सीट क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जाएगा। प्रत्येक बस में फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, खिड़कियों पर सुरक्षा ग्रिल तथा स्कूल का नाम और संपर्क नंबर अंकित होना अनिवार्य रहेगा। साथ ही बस चालक के पास भारी वाहन चलाने का कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए तथा वह यातायात नियमों के गंभीर उल्लंघन का दोषी नहीं होना चाहिए।
बैठक में केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम-17 का भी उल्लेख किया गया। इसके अनुसार वाहन चालक के अतिरिक्त एक अन्य वयस्क व्यक्ति का बस में उपस्थित रहना आवश्यक है। छात्राओं के परिवहन की स्थिति में महिला सहायिका या महिला शिक्षक की नियुक्ति अनिवार्य होगी। इसके अलावा बच्चों के बस्ते रखने के लिए पर्याप्त स्थान, दो दरवाजे, आपातकालीन निकास, स्पीड गवर्नर तथा सुरक्षित लॉकिंग व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने बताया कि सभी स्कूली वाहनों में गति नियंत्रक यंत्र अधिकतम 40 किलोमीटर प्रति घंटा की सीमा पर सेट होना चाहिए। बस चालकों का नियमित नेत्र परीक्षण एवं स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया जाना आवश्यक है। प्रत्येक छह माह में चिकित्सा परीक्षण करवाना अनिवार्य रहेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चालक शारीरिक रूप से वाहन संचालन के लिए सक्षम है और किसी प्रकार के नशीले पदार्थों का आदी नहीं है।

स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारियों पर चर्चा करते हुए अधिकारियों ने निर्देश दिए कि प्रत्येक विद्यालय यह रिकॉर्ड रखे कि कौन-सा विद्यार्थी किस वाहन से स्कूल आता और जाता है। साथ ही वाहन चालक के ड्राइविंग लाइसेंस, पुलिस सत्यापन, वाहन पंजीयन, फिटनेस प्रमाण पत्र, बीमा, परमिट और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र की प्रतियां विद्यालय में सुरक्षित रखी जाएं।
बैठक में एलपीजी संचालित वाहनों को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। अधिकारियों ने कहा कि एलपीजी गैस किट से संचालित वाहन सुरक्षा की दृष्टि से जोखिमपूर्ण हो सकते हैं, इसलिए ऐसे वाहनों का उपयोग बच्चों के परिवहन में नहीं किया जाना चाहिए। यदि कोई बच्चा ऐसे वाहन से स्कूल आता पाया जाता है तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस एवं परिवहन विभाग को दी जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सभी वाहनों में जीपीएस, सीसीटीवी कैमरे, फर्स्ट एड किट, अग्निशमन यंत्र और स्पीड गवर्नर लगाने के निर्देश दिए गए। स्कूल परिसर में बच्चों को चढ़ाने और उतारने की व्यवस्था सीसीटीवी निगरानी वाले सुरक्षित स्थान पर करने को कहा गया। साथ ही प्रत्येक विद्यालय में “शाला परिवहन समन्वय समिति” गठित करने के निर्देश दिए गए, जो परिवहन व्यवस्था की नियमित निगरानी करेगी।

अभिभावकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए अधिकारियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल प्रशासन या स्कूल की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि अभिभावकों की भी समान भागीदारी आवश्यक है। अभिभावकों से अपील की गई कि वे ऐसे वाहनों में अपने बच्चों को न भेजें जिनके पास वैध परमिट, फिटनेस या लाइसेंस न हो अथवा जिनमें क्षमता से अधिक बच्चे बैठाए जा रहे हों। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि न्यायालय द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले अभिभावकों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की जा सकती है।
उप पुलिस अधीक्षक (यातायात) ने बताया कि स्कूली वाहनों की नियमित जांच की जाएगी तथा सभी चालकों को निर्धारित गणवेश में वाहन संचालन करना होगा। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूलों को तत्काल शाला परिवहन समन्वय समिति का गठन करने के निर्देश दिए।
बैठक के अंत में अपर कलेक्टर ने कहा कि सभी वाहन चालकों और अटेंडरों का चरित्र सत्यापन अनिवार्य रूप से कराया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है, इसलिए यह समय व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का है। 15 जून के बाद प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से स्कूली वाहनों की जांच करेंगे तथा किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।