समान नागरिक संहिता पर जन विमर्श आज: सागर में नागरिकों, विधि विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से मांगे जाएंगे सुझाव !

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मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) के अध्ययन एवं परीक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति 4 जून को सागर में जन विमर्श कार्यक्रम आयोजित करेगी। इस महत्वपूर्ण बैठक का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों, विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों तथा आम नागरिकों से सुझाव एवं विचार प्राप्त करना है, ताकि समान नागरिक संहिता के संबंध में व्यापक अध्ययन और परीक्षण की प्रक्रिया जनभागीदारी के साथ संचालित की जा सके।

जिला प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार यह जन विमर्श कार्यक्रम 4 जून 2026 को प्रातः 10:30 बजे डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर के अभिमंच सभागार में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्चस्तरीय समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ कानूनविद् श्री अनूप नायर करेंगे।

प्रदेश सरकार द्वारा गठित यह समिति समान नागरिक संहिता के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर रही है। समिति का उद्देश्य यह समझना है कि राज्य में यूसीसी लागू किए जाने की संभावनाएं क्या हैं, इससे समाज के विभिन्न वर्गों पर क्या प्रभाव पड़ेगा तथा इसके संबंध में जनता की क्या राय है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न जिलों में जन संवाद और जन विमर्श कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

समान नागरिक संहिता देश में लंबे समय से चर्चा और बहस का विषय रही है। इसका मूल उद्देश्य विभिन्न समुदायों में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और पारिवारिक कानूनों से संबंधित अलग-अलग प्रावधानों के स्थान पर सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू करने की अवधारणा से जुड़ा है। इस विषय पर समाज में विभिन्न प्रकार के विचार और दृष्टिकोण मौजूद हैं, इसलिए सरकार व्यापक स्तर पर जनमत और सुझाव प्राप्त करने की प्रक्रिया अपना रही है।

सागर में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में नागरिकों को अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा। जिला प्रशासन ने विशेष रूप से बुद्धिजीवियों, अधिवक्ताओं, कानून के विद्यार्थियों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, महिला संगठनों, युवा वर्ग तथा अन्य संबंधित पक्षों से बैठक में सहभागिता करने की अपील की है।समान नागरिक संहिता पर जन विमर्श आज: सागर में नागरिकों, विधि विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से मांगे जाएंगे सुझाव

अधिकारियों का कहना है कि किसी भी महत्वपूर्ण नीति या कानूनी व्यवस्था के अध्ययन के दौरान समाज के सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक होती है। इसी उद्देश्य से समिति सीधे नागरिकों के बीच पहुंचकर उनके सुझाव प्राप्त कर रही है। कार्यक्रम में प्रतिभागी समान नागरिक संहिता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार, सुझाव और अनुभव साझा कर सकेंगे।

बैठक के दौरान उच्चस्तरीय समिति के सदस्य उपस्थित लोगों से संवाद स्थापित करेंगे और प्राप्त सुझावों को दस्तावेजीकृत किया जाएगा। बाद में इन सुझावों को समिति की रिपोर्ट में शामिल किए जाने पर विचार किया जाएगा। इससे राज्य सरकार को नीति निर्माण और अध्ययन प्रक्रिया में जनभावनाओं को समझने में सहायता मिलेगी।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्यक्रम केवल विचार-विमर्श और सुझाव प्राप्त करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। इसमें विभिन्न सामाजिक, कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर चर्चा होगी तथा आम नागरिकों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे जन विमर्श कार्यक्रम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि इनके माध्यम से नीति निर्माण से जुड़े विषयों पर आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित होती है। सागर में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

जिला प्रशासन ने सभी इच्छुक नागरिकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय पर कार्यक्रम में उपस्थित होकर अपने विचार और सुझाव साझा करें। प्रशासन का कहना है कि जितनी अधिक जनभागीदारी होगी, उतना ही व्यापक और संतुलित दृष्टिकोण समिति को प्राप्त होगा।

4 जून को आयोजित होने वाला यह जन विमर्श कार्यक्रम समान नागरिक संहिता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर समाज और नीति निर्माताओं के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा, जहां विभिन्न वर्गों की राय और सुझावों के आधार पर अध्ययन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

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