दलीपुर में फल-फूल रहा अवैध कच्ची शराब का कारोबार: महुआ से बन रही शराब, ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग !

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छतरपुर, छतरपुर जिले के बमनौरा थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम दलीपुर में अवैध कच्ची शराब के निर्माण और बिक्री का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव और उसके आसपास के क्षेत्रों में महुआ से तैयार की जाने वाली कच्ची शराब का कारोबार खुलेआम संचालित हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस पर प्रभावी कार्रवाई करने में असफल साबित हो रहे हैं। इससे क्षेत्र में न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और सामाजिक वातावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, गांव के समीप कुछ स्थानों पर महुआ लहान से शराब तैयार की जा रही है और उसे स्थानीय स्तर पर बेचा भी जा रहा है। आरोप है कि यह गतिविधियां लंबे समय से जारी हैं, लेकिन आबकारी विभाग और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। परिणामस्वरूप अवैध शराब का यह कारोबार धीरे-धीरे विस्तार लेता जा रहा है।

स्वास्थ्य पर पड़ रहा गंभीर असर

स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध रूप से तैयार की जाने वाली इस शराब में गुणवत्ता और सुरक्षा संबंधी किसी भी मानक का पालन नहीं किया जाता। ऐसे में शराब के जहरीली या मिलावटी होने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने दावा किया है कि इस शराब का सेवन करने के बाद क्षेत्र के कुछ लोग बीमार भी पड़ चुके हैं।

हालांकि स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन की ओर से अभी तक ऐसी घटनाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है। अवैध शराब से जुड़ी घटनाओं में अक्सर जहरीली शराब के कारण जनहानि तक की खबरें सामने आती रही हैं, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है।

गांव में बढ़ रही सामाजिक समस्याएं

ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शराब का कारोबार केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी गंभीर समस्या बनता जा रहा है। गांव के युवाओं और मजदूर वर्ग के कुछ लोग इस शराब की लत का शिकार हो रहे हैं। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है और घरेलू विवादों की घटनाओं में भी वृद्धि देखने को मिल रही है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शराब आसानी से उपलब्ध होने के कारण कई लोग नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं, जिससे गांव का सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की मांग की है।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शराब निर्माण और बिक्री का यह धंधा कई दिनों से बिना किसी रोक-टोक के संचालित हो रहा है। इसके बावजूद न तो आबकारी विभाग ने कोई बड़ी कार्रवाई की है और न ही स्थानीय प्रशासन ने प्रभावी हस्तक्षेप किया है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय-समय पर नियमित जांच और छापेमार कार्रवाई की जाए तो इस अवैध कारोबार पर आसानी से अंकुश लगाया जा सकता है। लेकिन जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता के कारण शराब माफियाओं के हौसले बुलंद बने हुए हैं।

जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

दलीपुर गांव के निवासियों ने जिला प्रशासन और आबकारी विभाग से तत्काल जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि अवैध शराब बनाने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही शराब निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री और उपकरणों को जब्त कर इस कारोबार को पूरी तरह बंद कराया जाना चाहिए।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि गांव और आसपास के क्षेत्रों में नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियां दोबारा शुरू न हो सकें।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

अवैध शराब का कारोबार प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल छापेमारी से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए जागरूकता अभियान, वैकल्पिक रोजगार के अवसर और लगातार निगरानी की भी आवश्यकता होती है।

दलीपुर गांव का मामला भी प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है। यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर प्रभावी कार्रवाई की जाती है तो इससे क्षेत्र में कानून का विश्वास मजबूत होगा और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

फिलहाल ग्रामीण प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि आबकारी विभाग और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और अवैध शराब के इस कारोबार पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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