दमोह। जिले के पथरिया विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बांसाकला में कक्षा 12वीं के एक छात्र द्वारा अपने क्लास टीचर पर गंभीर आरोप लगाए जाने का मामला सामने आया है। छात्र का आरोप है कि उसे जानबूझकर नियमित छात्र (रेगुलर) से निजी छात्र (प्राइवेट) बना दिया गया, जिससे उसका भविष्य संकट में पड़ गया है। इस संबंध में छात्र ने कलेक्टर दमोह और सागर संभाग के संयुक्त संचालक (जेडी) लोक शिक्षण को शिकायत भेजकर निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।
मामले ने शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बना दिया है। जहां एक ओर छात्र और उसके परिजन इसे व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विद्यालय प्रबंधन और संबंधित शिक्षक का कहना है कि छात्र की कम उपस्थिति के कारण बोर्ड के नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई है।
जानकारी के अनुसार बांसाकला निवासी छात्र शिवंक ठाकुर ने हाल ही में घोषित हुई कक्षा 12वीं की परीक्षा में 500 में से 324 अंक प्राप्त कर प्रथम श्रेणी हासिल की है। परिणाम आने के बाद जब उसने अपनी अंकसूची देखी तो उसमें उसे नियमित छात्र के बजाय प्राइवेट छात्र दर्शाया गया था। इतना ही नहीं, मार्कशीट में प्रायोगिक विषयों के अंक भी दर्ज नहीं थे। यह देखकर छात्र और उसके परिजन हैरान रह गए।

छात्र शिवंक ठाकुर का कहना है कि उसने पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान विद्यालय में अध्ययन किया है। उसके पास माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) भी है, जिस पर विद्यालय के प्राचार्य के हस्ताक्षर और आधिकारिक मुहर लगी हुई है। एडमिट कार्ड में उसे नियमित छात्र के रूप में दर्शाया गया था। ऐसे में परिणाम घोषित होने के बाद अचानक उसे प्राइवेट छात्र घोषित किया जाना समझ से परे है।
शिवंक का आरोप है कि उसके कक्षा शिक्षक नर्मदा प्रसाद अहिरवार ने व्यक्तिगत रंजिश के चलते यह कार्रवाई करवाई है। छात्र का कहना है कि यदि वह पूरे वर्ष नियमित छात्र नहीं था तो उसे परीक्षा में नियमित छात्र के रूप में बैठने की अनुमति क्यों दी गई। उसने यह भी सवाल उठाया कि यदि उसकी उपस्थिति कम थी तो समय रहते उसे इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।
छात्र के परिजनों का कहना है कि उनके बेटे ने मेहनत कर अच्छे अंक प्राप्त किए हैं, लेकिन मार्कशीट में प्राइवेट छात्र दर्ज होने के कारण आगे की पढ़ाई और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में उसे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। परिवार ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
दूसरी ओर, आरोपों के घेरे में आए कक्षा शिक्षक नर्मदा प्रसाद अहिरवार ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत रंजिश के कारण छात्र के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोर्ड के नियमों के अनुसार यदि किसी छात्र की उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम रहती है तो उसे नियमित छात्र की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

शिक्षक का कहना है कि विद्यालय के उपस्थिति रजिस्टर में छात्र की उपस्थिति दर्ज है और यदि कोई जांच कराना चाहता है तो संबंधित अधिकारी रिकॉर्ड की जांच कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं और तथ्यों से परे हैं।
वहीं विद्यालय के प्राचार्य प्रशांत फट्टा ने भी छात्र के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि छात्र द्वारा दमोह से लेकर सागर तक विभिन्न स्तरों पर शिकायतें की गई हैं, लेकिन विद्यालय द्वारा जो भी कार्रवाई की गई है, वह पूरी तरह नियमों के अनुरूप की गई है। उन्होंने कहा कि छात्र की उपस्थिति निर्धारित मानक से कम थी, जिसके कारण नियमानुसार उसे प्राइवेट छात्र की श्रेणी में रखा गया।
प्राचार्य ने बताया कि शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा मंडल के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं, जिनका पालन सभी विद्यालयों को करना होता है। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत स्तर पर कोई निर्णय नहीं लिया जाता, बल्कि उपलब्ध रिकॉर्ड और नियमों के आधार पर कार्रवाई होती है।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और छात्रों की उपस्थिति संबंधी रिकॉर्ड व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि छात्र का दावा सही है तो यह प्रशासनिक लापरवाही का मामला हो सकता है, वहीं यदि विद्यालय प्रबंधन का पक्ष सही साबित होता है तो यह नियमों के पालन का विषय माना जाएगा।
फिलहाल छात्र द्वारा की गई शिकायत शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंच चुकी है। संभावना है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा विद्यालय के रिकॉर्ड, उपस्थिति पंजी, परीक्षा दस्तावेज और अन्य अभिलेखों की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि छात्र को प्राइवेट छात्र घोषित किए जाने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।
अब छात्र और उसके परिजन निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि विद्यालय प्रबंधन अपने निर्णय को पूरी तरह नियमसम्मत बता रहा है। ऐसे में सभी की निगाहें शिक्षा विभाग की जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं।