शेयर मार्केट में मुनाफे का झांसा, बिजली कर्मचारी से 2 लाख की साइबर ठगी !

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ग्वालियर में साइबर ठगों ने शेयर मार्केट में निवेश पर मोटा मुनाफा दिलाने का लालच देकर एक बिजली कर्मचारी से दो लाख रुपए की ठगी कर ली। ठगों ने पहले फर्जी निवेश एप और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए भरोसा जीतने की कोशिश की, फिर निवेश के नाम पर रकम जमा करवाई और बाद में पैसा निकालने पर अतिरिक्त राशि की मांग करने लगे। जब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ तो उसने साइबर हेल्पलाइन और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब मामले की जांच में जुटी है।

जानकारी के अनुसार, झांसी रोड थाना क्षेत्र स्थित श्रीराम कॉलोनी के मधुबन अपार्टमेंट निवासी विजय कुमार सिंधी बिजली विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वे पिछले कुछ समय से ऑनलाइन शेयर मार्केट में निवेश कर रहे थे। इसी दौरान 7 मई 2026 को उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति का व्हाट्सएप संदेश आया, जिसने अपना नाम हेमंत ओसवाल बताया। उसने दावा किया कि उसकी टीम शेयर मार्केट में निवेश कर कम समय में अधिक लाभ दिलाने का काम करती है।

धीरे-धीरे बातचीत बढ़ने पर आरोपी ने विजय कुमार को निवेश के लिए प्रेरित किया और एक अन्य मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराया। इसके बाद उन्हें “A1154 Magnum Traders Hub” नामक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया गया। ग्रुप में मौजूद लोगों द्वारा शेयर मार्केट से जुड़ी सलाह और निवेश के अवसरों की जानकारी दी जाती थी। वहीं एक अन्य व्यक्ति ने स्वयं को “निश्चल संतोष जैन, चीफ एनालिस्ट एट मैग्नम” बताते हुए विजय को “Magnum Smart” नाम का मोबाइल एप डाउनलोड करवाया।

शुरुआत में ठगों ने भरोसा जीतने की रणनीति अपनाई। उन्होंने पीड़ित को निवेश करने के लिए प्रेरित किया और बताया कि कम समय में अच्छा रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है। आरोपियों के झांसे में आकर विजय कुमार ने 3 जून 2026 को बताए गए बैंक खाते में एक लाख रुपए जमा कर दिए। कुछ ही समय बाद एप्लीकेशन में उन्हें 17 हजार रुपए का लाभ दिखाया गया। इससे उन्हें लगा कि निवेश सही दिशा में जा रहा है और वे और अधिक लाभ कमा सकते हैं।

ठगों ने इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाया और अगले ही दिन अधिक कमाई का लालच देकर एक लाख रुपए और निवेश करवा लिए। 4 जून को दूसरी बार राशि जमा करने के बाद एप्लीकेशन में लगभग 60 हजार रुपए से अधिक का लाभ दिखाया गया। लगातार बढ़ते आंकड़े देखकर पीड़ित को विश्वास हो गया कि उनका निवेश सफल हो रहा है।

लेकिन असली खेल तब सामने आया जब विजय कुमार ने अपनी जमा राशि और लाभ निकालने की कोशिश की। 5 जून को उन्होंने एप से पैसा निकालने का प्रयास किया, लेकिन निकासी नहीं हो सकी। जब उन्होंने इस संबंध में ग्रुप के सदस्यों और कथित एनालिस्ट से संपर्क किया तो उनसे कहा गया कि राशि निकालने के लिए पहले 10 लाख रुपए और जमा करने होंगे। यह सुनकर उन्हें संदेह हुआ।

कुछ ही देर बाद उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप से हटा दिया गया। इसके साथ ही एप्लीकेशन में दिखाई जा रही उनकी पूरी राशि लगभग शून्य हो गई। तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगों के जाल में फंस चुके हैं। ठगों ने फर्जी लाभ दिखाकर उनसे दो लाख रुपए ऐंठ लिए थे।

ठगी का पता चलते ही विजय कुमार ने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। उन्हें शिकायत क्रमांक 32106260025358 जारी किया गया। उन्होंने पुलिस को बताया कि व्हाट्सएप चैट, बैंक लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्य उनके पास सुरक्षित हैं, जिन्हें जांच एजेंसियों को सौंपा जाएगा।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। साइबर विशेषज्ञ संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जानकारी जुटा रहे हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या यही गिरोह अन्य लोगों को भी इसी प्रकार फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए निशाना बना रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश से पहले किसी भी कंपनी, एप या सलाहकार की विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति या संस्था कम समय में अत्यधिक मुनाफे का दावा करती है, तो उससे सतर्क रहना चाहिए। साइबर अपराधी अक्सर फर्जी एप, नकली ग्रुप और झूठे लाभ के आंकड़े दिखाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। ऐसे मामलों में निवेश करने से पहले अधिकृत वित्तीय सलाहकारों और मान्यता प्राप्त प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करना सुरक्षित माना जाता है।

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