हरदा में करणी सेना प्रदर्शन पर लाठीचार्ज—मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, प्रशासन से मांगी रिपोर्ट !

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हरदा | 16 जुलाई 2025
मध्यप्रदेश के हरदा जिले में करणी सेना परिवार के प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुए टकराव ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। राजपूत छात्रावास में घुसकर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज को लेकर भारी विरोध के बाद, मुख्यमंत्री ने इस मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया है और जिला प्रशासन से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है।

मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा, “हरदा छात्रावास प्रकरण का संज्ञान लेकर मैंने जिला प्रशासन से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। हमारी सरकार के लिए सामाजिक न्याय और परस्पर सद्भाव सर्वोच्च प्राथमिकता है। मध्यप्रदेश में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की किसी को अनुमति नहीं दी जाएगी।

🔍 विवाद की टाइमलाइन — कैसे बढ़ा मामला?

  • 11–12 जुलाई को विवाद की शुरुआत हुई, जब करणी सेना परिवार के नेता आशीष सिंह राजपूत ने मोगली थाने में ₹18 लाख की हीरा खरीद धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में विकास लोधी, मोहित वर्मा और उमेश तपानिया को नामजद किया गया।
  • 12–13 जुलाई को पुलिस ने आरोपी मोहित वर्मा को गिरफ्तार कर कोर्ट ले जाने की कोशिश की, लेकिन करीब 40–50 करणी सेना कार्यकर्ताओं ने कोर्ट परिसर और मुख्य मार्ग पर रास्ता रोककर आरोपी को सौंपने की मांग की। टकराव बढ़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस का प्रयोग किया। कई कार्यकर्ता, जिनमें जिला अध्यक्ष सुनील राजपूत और आशीष राजपूत शामिल थे, गिरफ्तार कर लिए गए।
  • 14 जुलाई (रविवार) को स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों ने खंडवा बायपास हाईवे सहित कई मार्गों को जाम कर दिया, जिससे स्कूल, एम्बुलेंस सहित आम जनजीवन प्रभावित हुआ। पुलिस को दोबारा बल प्रयोग करना पड़ा, जिसमें तीन बार लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।
  • कोर्ट परिसर और छात्रावास में प्रवेश कर की गई पुलिस कार्रवाई को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने छात्रावास में घुसकर न केवल छात्रों, बल्कि महिलाओं और बच्चों को भी पीटा।
  • 14 जुलाई तक 60 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि हो चुकी थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने धारा 163 BNS (पूर्व धारा 144) लागू कर दी।
  • 15 जुलाई को, करणी सेना परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुर को शर्तों के साथ रिहा किया गया। उन्होंने आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने और उसे जारी रखने की बात कही।
  • इसी दिन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी हरदा पहुंचे और लाठीचार्ज झेल चुके छात्रों से मुलाकात की। स्थानीय लोगों ने न्यायिक जांच की मांग की और पुलिस पर एकतरफा और बर्बर कार्रवाई का आरोप लगाया।

📹 प्रशासन का पक्ष

विवाद के बढ़ते दबाव और आलोचना को देखते हुए प्रशासन ने अधिकृत रिपोर्ट और वीडियो फुटेज जारी किए। इन फुटेज के माध्यम से यह दर्शाने की कोशिश की गई कि पुलिस कार्रवाई किसी विशेष समूह के खिलाफ नहीं, बल्कि स्थानीय कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई थी। हालांकि इस दावे को लेकर लोगों में असंतोष बना हुआ है।


🧾 निष्कर्ष:

हरदा की यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था के सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सामाजिक संगठनों और पुलिस प्रशासन के बीच संवाद की कमी किस प्रकार हिंसक टकराव का रूप ले सकती है। मुख्यमंत्री द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक निष्कर्षों पर टिकी हैं। स्थानीय समुदाय अब इस प्रकरण में निष्पक्ष और पारदर्शी कार्यवाही की अपेक्षा कर रहा है।

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