पांढुर्णा, 8 सितंबर 2025: मध्यप्रदेश के पांढुर्णा जिले के मोहगांव थाना क्षेत्र में एक पारिवारिक विवाद ने दुखद मोड़ ले लिया, जब शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे 62 वर्षीय सुभाष गोरे की हार्ट अटैक से मौत हो गई। सुभाष रविवार (7 सितंबर) रात को अपने छोटे भाई शिवलाल गोरे, भाभी सुनंदा, और भतीजे राहुल के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे थे। शिकायत लिखते समय अचानक उन्हें सीने में दर्द हुआ और उनकी मृत्यु हो गई। मोहगांव पुलिस ने इस मामले में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या का मामला दर्ज किया है।

दीवार को लेकर भाइयों के बीच विवाद
सुभाष गोरे के बेटे राजेश गोरे ने बताया कि रविवार शाम 5 बजे उनके चाचा शिवलाल गोरे से उनके मकान की दीवार तोड़ने को लेकर विवाद हुआ था। सुभाष का मकान निर्माणाधीन है, जबकि शिवलाल का मकान पहले से बना हुआ है। दीवार खड़ी करने को लेकर पिछले 5-6 महीनों से दोनों भाइयों के बीच तनाव चल रहा था। राजेश के अनुसार, विवाद के दौरान शिवलाल, उनकी पत्नी सुनंदा, और बेटे राहुल ने मिलकर सुभाष के साथ मारपीट की, जिससे उनके सिर और सीने पर चोटें आईं।
मारपीट की इस घटना से आहत सुभाष रात को मोहगांव पुलिस थाने पहुंचे और अपने भाई, भाभी, और भतीजे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की। शिकायत लिखते समय अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ। पुलिस कर्मियों ने तत्काल उन्हें सौसर सिविल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमॉर्टम और हत्या का मामला दर्ज
सोमवार सुबह सुभाष के शव का परिजनों की मौजूदगी में पोस्टमॉर्टम किया गया। पांढुर्णा एसडीओपी बृजेश भार्गव ने बताया कि मृतक के बेटे राजेश की शिकायत के आधार पर शिवलाल गोरे, उनकी पत्नी सुनंदा, और बेटे राहुल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मोहगांव पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि मारपीट और हार्ट अटैक के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत का सटीक कारण स्पष्ट होगा।

परिवार का आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि
सुभाष गोरे और शिवलाल गोरे दोनों ही पेशे से किसान हैं और पांढुर्णा के ग्रामीण क्षेत्र में खेती-किसानी करते हैं। सुभाष के परिवार में उनकी पत्नी, बेटा राजेश, और बहू हैं। दूसरी ओर, शिवलाल का परिवार भी गांव में ही रहता है। दोनों भाइयों के बीच मकान की दीवार को लेकर लंबे समय से तनाव था, जो रविवार को हिंसक झड़प में बदल गया। इस घटना ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि ग्रामीण समुदाय में भी चर्चा का विषय बन गया है।
हार्ट अटैक और मारपीट का संभावित संबंध
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, तनाव और शारीरिक चोट हार्ट अटैक को ट्रिगर कर सकते हैं, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से हृदय संबंधी समस्याएं हों। सुभाष को मारपीट के दौरान सीने और सिर पर चोटें आई थीं, जिसके बाद थाने में शिकायत के दौरान उन्हें हार्ट अटैक हुआ। यह संभावना जताई जा रही है कि मारपीट से उत्पन्न शारीरिक और मानसिक तनाव उनकी मृत्यु का कारण बना हो। हालांकि, पुलिस और चिकित्सा विशेषज्ञ पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हार्ट अटैक का कारण मारपीट थी या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं।

पुलिस की कार्रवाई और जांच
मोहगांव पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। एसडीओपी बृजेश भार्गव ने बताया कि पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। आरोपियों से पूछताछ में यह पता लगाया जा रहा है कि विवाद के पीछे और कोई कारण तो नहीं था। साथ ही, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मारपीट की घटना और हार्ट अटैक के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं। स्थानीय लोगों ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है, लेकिन इस घटना ने पारिवारिक विवादों को हिंसक रूप लेने से रोकने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया है।
निष्कर्ष
सुभाष गोरे की मौत ने एक बार फिर पारिवारिक विवादों के हिंसक परिणामों को सामने लाया है। एक छोटे से दीवार विवाद ने न केवल एक व्यक्ति की जान ले ली, बल्कि एक परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया। यह घटना समाज के लिए एक सबक है कि छोटे-मोटे विवादों को बातचीत और समझदारी से सुलझाने की जरूरत है। साथ ही, यह प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी एक चेतावनी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तनाव प्रबंधन और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है। मोहगांव पुलिस की त्वरित कार्रवाई इस मामले में न्याय की उम्मीद जगाती है, लेकिन सुभाष के परिवार के लिए यह दुखद हानि अपूरणीय है।