भोपाल,
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 का आयोजन रविवार को कड़ी सुरक्षा और सख्त दिशा-निर्देशों के बीच किया गया। भोपाल में इस बार 33 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां करीब 14 हजार अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक चलने वाली इस परीक्षा को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया।
परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही अभ्यर्थियों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। निर्धारित समय के अनुसार 11:00 बजे से प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुई, जबकि दोपहर 1:30 बजे के बाद किसी भी अभ्यर्थी को एंट्री नहीं दी गई। केंद्रों के बाहर पुलिस बल तैनात रहा और हर अभ्यर्थी की सघन जांच के बाद ही प्रवेश दिया गया।
बायोमेट्रिक फेल होने पर भी एंट्री की सुविधा
इस बार NEET परीक्षा में बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य किया गया था, लेकिन तकनीकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने एक अहम निर्णय लिया। यदि किसी अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन मशीन खराब होने, नेटवर्क समस्या या अन्य कारणों से फेल हो जाता है, तो भी उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जा रही है।
हालांकि, ऐसी स्थिति में अभ्यर्थियों को एक लिखित अंडरटेकिंग (घोषणा पत्र) देना अनिवार्य किया गया है। यह फॉर्म परीक्षा केंद्र पर ही उपलब्ध कराया गया, जिससे छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा के दौरान (2:00 से 5:00 बजे के बीच) किसी भी अभ्यर्थी को बायोमेट्रिक प्रक्रिया के लिए परेशान नहीं किया जाएगा। वहीं PwD (दिव्यांग) अभ्यर्थियों के लिए यह सुविधा शाम 6:00 बजे तक लागू रहेगी।
ड्रेस कोड और सुरक्षा व्यवस्था सख्त
परीक्षा को लेकर इस बार ड्रेस कोड का सख्ती से पालन कराया गया। केवल हल्के और हाफ स्लीव कपड़े पहनकर आने वाले अभ्यर्थियों को ही प्रवेश दिया गया। जूतों पर पूर्ण प्रतिबंध रहा, जबकि चप्पल और सैंडल पहनने की अनुमति दी गई।
इसका उद्देश्य सुरक्षा जांच को आसान बनाना और किसी भी तरह की अनुचित सामग्री को परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने से रोकना है।
इसके अलावा मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर, पेन ड्राइव, बैग, बेल्ट, गहने और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया। किसी भी अभ्यर्थी के पास प्रतिबंधित सामग्री मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
परीक्षा केंद्रों के बाहर भी सख्त व्यवस्था
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अभ्यर्थियों के परिजनों को परीक्षा केंद्र से 100 मीटर पहले ही रोक दिया गया। इससे केंद्रों के आसपास अनावश्यक भीड़ नहीं जुटी और परीक्षा प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो सकी।
अभ्यर्थियों के बैग और अन्य सामान रखने के लिए भी केंद्र से दूर अलग व्यवस्था की गई थी, जिससे अंदर अनुशासन बना रहे।
स्वास्थ्य सुविधाओं का विशेष ध्यान
गर्मी के मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष इंतजाम किए। भोपाल में 66 मेडिकल टीमों की तैनाती की गई, जिसमें प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर एक डॉक्टर और एक पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद रहा।
इसके अलावा 108 एम्बुलेंस सेवा को अलर्ट मोड पर रखा गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।
हर केंद्र पर ओआरएस, प्राथमिक उपचार दवाएं और आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए गए। अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए दो-दो इंटर्न डॉक्टरों की भी ड्यूटी लगाई गई थी, जिनके मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराए गए।

पारदर्शिता बनाए रखने पर प्रशासन का फोकस
पिछले वर्षों में परीक्षा को लेकर उठे विवादों को देखते हुए इस बार प्रशासन ने पारदर्शिता और सुरक्षा पर विशेष जोर दिया है। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में पूरी परीक्षा प्रक्रिया संचालित की जा रही है।
प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर फ्रिस्किंग (तलाशी) और बायोमेट्रिक जांच के बाद ही अभ्यर्थियों को अंदर भेजा गया।
अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं। किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनुचित साधनों के उपयोग पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अभ्यर्थियों में उत्साह और आत्मविश्वास
कड़ी व्यवस्थाओं के बावजूद अभ्यर्थियों में उत्साह और आत्मविश्वास देखने को मिला। कई छात्रों ने कहा कि व्यवस्थाएं बेहतर हैं और उन्हें परीक्षा देने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।
वहीं, अभिभावकों ने भी प्रशासन की तैयारियों की सराहना की और उम्मीद जताई कि परीक्षा निष्पक्ष रूप से संपन्न होगी।

कुल मिलाकर, NEET-UG 2026 का आयोजन भोपाल में सुव्यवस्थित और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच संपन्न हो रहा है। बायोमेट्रिक फेल होने पर भी एंट्री जैसी सुविधा ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी अभ्यर्थी तकनीकी कारणों से परीक्षा से वंचित न रहे।
अब सभी की नजर परीक्षा के परिणामों पर टिकी है, जो लाखों छात्रों के मेडिकल करियर की दिशा तय करेंगे।