भोपाल में एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की छात्रा रोशनी कलैश की संदिग्ध मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जांच की रफ्तार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए परिजन और मेडिकल छात्रों ने शुक्रवार को जमकर विरोध प्रदर्शन किया। दिन में कोहेफिजा थाना का घेराव करने के बाद देर रात पुलिस जब पूछताछ के लिए हॉस्टल पहुंची तो छात्रों और पुलिस के बीच तीखी बहस हो गई।
घटना शुक्रवार रात करीब 11:30 बजे की है, जब तीन पुलिसकर्मी गांधी मेडिकल कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल डी ब्लॉक पहुंचे। पुलिस का कहना था कि वे रोशनी के साथ रहने वाली एक छात्रा से पूछताछ करने आए हैं। हालांकि मौके पर मौजूद छात्राओं ने आरोप लगाया कि पुलिस बिना वारंट और लिखित आदेश के हॉस्टल में प्रवेश कर रही थी। इसको लेकर छात्रों ने विरोध दर्ज कराया और लिखित अनुमति दिखाने की मांग की।

मौके पर मौजूद छात्रों के अनुसार, शुरुआती समय में केवल पुरुष पुलिसकर्मी मौजूद थे, जिससे छात्राओं में आक्रोश बढ़ गया। बाद में रात करीब 1 बजे एक महिला कॉन्स्टेबल को बुलाया गया। इस दौरान एडिशनल डीसीपी शालिनी दीक्षित भी मौके पर पहुंचीं। छात्रों द्वारा वारंट की मांग पर उन्होंने कहा कि पुलिस को हर बार अलग से अनुमति की आवश्यकता नहीं होती, हालांकि बाद में उन्होंने आवश्यक अनुमति होने की बात कही।
करीब एक घंटे तक संबंधित छात्रा को एक अलग कमरे में बैठाकर पूछताछ की गई। बाहर खड़े मेडिकल छात्र इस कार्रवाई का विरोध करते रहे। उनका कहना था कि देर रात छात्राओं से पूछताछ करना अनुचित है और इससे मानसिक दबाव बनता है। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाया कि पुलिस छात्राओं को परेशान करने के उद्देश्य से आई थी और एक छात्रा को जबरन थाने ले जाने की कोशिश की गई। हालांकि पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि यह सामान्य जांच प्रक्रिया का हिस्सा है।

गौरतलब है कि मामला 10 फरवरी का है, जब रोशनी कलैश का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बाथरूम में मिला था। वह मूल रूप से आलीराजपुर की रहने वाली थी और पिछले वर्ष अक्टूबर में एमबीबीएस में प्रवेश लिया था। वह कोहेफिजा थाना क्षेत्र में एक निजी पीजी में रह रही थी। सुबह जब वह कॉलेज नहीं पहुंची और कमरे का दरवाजा नहीं खोल रही थी, तो साथियों ने गार्ड की मदद से दरवाजा तोड़ा। बाथरूम में वह अचेत अवस्था में मिली। पास में एक खाली एसिड की बोतल भी पाई गई। उसे तत्काल हमीदिया अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
शुक्रवार दोपहर रोशनी के परिजन और मेडिकल छात्रों ने कोहेफिजा थाने का घेराव कर पुलिस पर जांच में लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना है कि जिस स्थान पर शव मिला, उसे तुरंत सील नहीं किया गया और न ही वार्डन सहित जिम्मेदार अधिकारियों के बयान समय पर दर्ज किए गए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी या विशेष जांच टीम से कराई जाए।

मामले को जनजातीय संगठनों का भी समर्थन मिला है, क्योंकि रोशनी आदिवासी समुदाय से संबंधित बताई जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक छात्रा की मौत का मामला नहीं, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा और पारदर्शी जांच का मुद्दा है।
कॉलेज प्रशासन की ओर से डीन डॉ. कविता एन. सिंह ने बताया कि छात्रा के मोबाइल से मिले संदेशों में पढ़ाई के तनाव का जिक्र मिला है। हालांकि परिजन और छात्र इस एंगल को अंतिम सत्य मानने को तैयार नहीं हैं और निष्पक्ष व पारदर्शी जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और संबंधित लोगों से पूछताछ जारी है। वहीं, छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जांच में पारदर्शिता नहीं बरती गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।