ग्वालियर में 4 मई को दुग्ध क्रांति का बिगुल: 20 हजार पशुपालकों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे राज्य स्तरीय सम्मेलन का शुभारंभ !

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सागर,
मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 4 मई को ग्वालियर में राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सम्मेलन का शुभारंभ करेंगे। यह भव्य आयोजन मेला ग्राउंड में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रदेशभर से 20 हजार से अधिक पशुपालक, दुग्ध उत्पादक और सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

इस सम्मेलन में पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को स्वीकृति प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम में पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल की विशेष उपस्थिति भी रहेगी। यह आयोजन न केवल योजनाओं के लाभ वितरण का मंच बनेगा, बल्कि पशुपालन क्षेत्र में नवाचार और अनुभवों के आदान-प्रदान का भी महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, जिसके तहत किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक तकनीकों, उन्नत नस्लों और सहकारी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य मध्यप्रदेश को देश का “मिल्क कैपिटल” बनाना है, ताकि यहां के दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और स्थायी आय के अवसर मिल सकें।

सम्मेलन की खास बात यह होगी कि इसमें “मैत्री कार्यकर्ता”, उत्कृष्ट पशुपालक, क्षीरधारा ग्रामों के सरपंच और सहकारी दुग्ध समितियों के सदस्य अपने अनुभव साझा करेंगे। ये वे लोग हैं जिन्होंने जमीनी स्तर पर पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके अनुभव अन्य पशुपालकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे और उन्हें आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

इसके अलावा, कार्यक्रम स्थल पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों द्वारा प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इस प्रदर्शनी में दुग्ध उत्पादन से जुड़ी नई तकनीकों, पशु स्वास्थ्य सेवाओं, चारे की उन्नत विधियों और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। इससे पशुपालकों को न केवल नई जानकारियां मिलेंगी, बल्कि वे इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े स्तर के सम्मेलन से न केवल पशुपालकों के बीच जागरूकता बढ़ती है, बल्कि सरकार और जमीनी स्तर के हितग्राहियों के बीच सीधा संवाद भी स्थापित होता है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ती है।

मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन पहले से ही तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी इसमें अपार संभावनाएं हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभर रहा है। ऐसे में यह सम्मेलन राज्य के लाखों पशुपालकों के लिए नई उम्मीद और अवसर लेकर आया है।

कुल मिलाकर, ग्वालियर में होने वाला यह राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सम्मेलन न केवल एक सरकारी आयोजन है, बल्कि यह प्रदेश में दुग्ध क्रांति की दिशा में एक मजबूत पहल के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल और सरकार की नीतियों से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में देश में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

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