छतरपुर (मध्य प्रदेश) में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़े पैमाने पर कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। जिला कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों के प्राचार्यों, हेडमास्टरों और शाला प्रभारियों की बैठक लेकर नाराजगी जताई और स्पष्ट कहा कि शिक्षा में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह सख्त कदम ऐसे समय उठाया गया है जब जिले के कई सरकारी और निजी स्कूलों के परीक्षा परिणाम संतोषजनक नहीं पाए गए हैं। कलेक्टर ने साफ निर्देश दिए कि छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं किया जा सकता और हर स्तर पर सुधार जरूरी है।

खराब प्रदर्शन पर वेतन वृद्धि रोकी, कई शिक्षकों पर कार्रवाई
बैठक में कई स्कूलों के प्राचार्यों और शिक्षकों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए। शासकीय उमावि बमनौराकला के प्राचार्य की दो वेतन वृद्धि रोकने और अंग्रेजी शिक्षक के निलंबन का प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजने के आदेश दिए गए हैं।
इसके अलावा शासकीय हाई स्कूल निमानी, बाजना, कुटौरा और गौरिहार सहित कई विद्यालयों के अतिथि शिक्षकों को हटाने और ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों की भूमिका की समीक्षा जरूरी है।
कई स्कूलों के प्रमुखों पर भी गाज
बैठक में बरेठी, बड़ामलहरा, ठकुर्रा, मउसहानियां, रनगुवां, नौगांव और राजनगर जैसे क्षेत्रों के स्कूलों के संस्था प्रमुखों पर भी कार्रवाई हुई है। कई प्राचार्यों की वेतन वृद्धि रोकने और वेतन कटौती के आदेश दिए गए हैं।
कुछ मामलों में प्राचार्यों को मई माह का केवल आंशिक वेतन देने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम जिम्मेदारी तय करने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जरूरी है।

5वीं और 8वीं के खराब रिजल्ट पर भी सख्ती
कलेक्टर ने केवल बोर्ड परीक्षाओं तक ही नहीं, बल्कि कक्षा 5वीं और 8वीं के परिणामों पर भी गंभीर चिंता जताई। जिन स्कूलों में 0 से 50 प्रतिशत तक परिणाम रहे हैं, उन पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।
कक्षा 5वीं के 14 और कक्षा 8वीं के 27 निजी स्कूलों की मान्यता समाप्त करने के लिए नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम जिले में शिक्षा स्तर सुधारने की दिशा में सबसे सख्त कार्रवाई माना जा रहा है।
अतिथि शिक्षकों पर भी कार्रवाई, ब्लैकलिस्ट की तैयारी
कई स्कूलों में खराब परिणाम के लिए जिम्मेदार पाए गए अतिथि शिक्षकों को हटाने और ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि केवल उपस्थिति नहीं, बल्कि शिक्षण गुणवत्ता भी प्राथमिकता होनी चाहिए।
नामांकन और स्कूल उपस्थिति पर चिंता
बैठक में कक्षा पहली में कम नामांकन को लेकर भी चिंता जताई गई। कलेक्टर ने बड़ामलहरा और ईशानगर के बीईओ को निर्देश दिया कि चाइल्ड ट्रैकिंग ऐप के माध्यम से बच्चों का सर्वे कर नामांकन बढ़ाया जाए।
साथ ही यह भी कहा गया कि जिन स्कूलों में बच्चों की अनुपस्थिति अधिक है, वहां शिक्षक अभिभावकों से संपर्क करें और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करें।
प्रशासन का सख्त संदेश
कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने बैठक में स्पष्ट संदेश दिया कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि छात्रों की पढ़ाई और भविष्य के साथ समझौता करने वाले किसी भी अधिकारी या शिक्षक को बख्शा नहीं जाएगा।
छतरपुर में हुई यह कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। जहां एक ओर खराब परिणाम देने वाले प्राचार्यों और शिक्षकों पर सख्ती बरती गई है, वहीं दूसरी ओर 41 निजी स्कूलों की मान्यता खत्म करने की प्रक्रिया ने पूरे जिले के शिक्षा तंत्र में हलचल पैदा कर दी है।
प्रशासन का दावा है कि इन कदमों का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारना और छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना है।