मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के जनजातीय समाज के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा, आवासीय सुविधाएं और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए लगातार व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व में जनजातीय कार्य विभाग द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य जनजातीय विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़कर उनका भविष्य मजबूत बनाना है।
जनजातीय कार्य मंत्री Kunwar Vijay Shah ने कहा है कि प्रदेश सरकार जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षा को इस विकास का सबसे मजबूत माध्यम माना गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि जनजातीय समाज का प्रत्येक बच्चा आधुनिक शिक्षा से जुड़कर अपने सपनों को साकार कर सके। इसके लिए स्कूलों, छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रदेश में जनजातीय कार्य विभाग द्वारा बड़ी संख्या में शैक्षणिक संस्थानों का संचालन किया जा रहा है। विभाग के अंतर्गत 17 हजार 794 प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं, जहां जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही 5 हजार 493 माध्यमिक विद्यालय, 1109 उच्च माध्यमिक विद्यालय तथा 804 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इन संस्थानों के माध्यम से लाखों विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

सरकार ने केवल विद्यालयी शिक्षा तक ही अपनी योजनाओं को सीमित नहीं रखा है, बल्कि विद्यार्थियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया है। प्रदेश में 8 आदर्श आवासीय विद्यालय तथा 82 माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर संचालित किए जा रहे हैं। इन संस्थानों में छात्राओं को विशेष रूप से सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि वे बिना किसी बाधा के शिक्षा प्राप्त कर सकें।
इसके अतिरिक्त प्रदेश में 94 सांदीपनि विद्यालय और 26 क्रीड़ा परिसर भी संचालित किए जा रहे हैं। इन क्रीड़ा परिसरों के माध्यम से विद्यार्थियों को खेल गतिविधियों में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि सरकार शिक्षा के साथ-साथ खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है।
प्रदेश में संचालित छात्रावासों और आश्रमों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा दी जा रही है। वर्तमान में 1 लाख 49 हजार 104 विद्यार्थियों को छात्रावास एवं आश्रमों में विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें 92 हजार 547 बालक तथा 56 हजार 557 बालिकाएं शामिल हैं। अनुसूचित जनजाति आश्रमों में 1078 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 568 बालक और 510 बालिकाएं शामिल हैं। वहीं जूनियर छात्रावासों में 9 हजार 981 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। सीनियर छात्रावासों में 68 हजार 670 तथा महाविद्यालयीन छात्रावासों में 8 हजार 710 विद्यार्थियों को सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
विद्यार्थियों को केवल रहने और पढ़ाई की सुविधा ही नहीं दी जा रही, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास के लिए खेल, संस्कृति और अध्ययन से जुड़ी कई व्यवस्थाएं भी की गई हैं। छात्रावासों एवं आश्रमों में प्रतिवर्ष 5 हजार रुपये की खेल सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी 5 हजार रुपये की राशि दी जाती है। इसके अलावा फर्नीचर और अन्य आवश्यक उपकरणों के लिए 50 हजार रुपये प्रतिवर्ष उपलब्ध कराए जाते हैं।
उत्कृष्ट छात्रावासों में विद्यार्थियों को स्टेशनरी सुविधा के रूप में प्रतिवर्ष 2 हजार रुपये तथा महाविद्यालयीन छात्रावासों में 1 हजार रुपये दिए जाते हैं। पोषण आहार के लिए उत्कृष्ट छात्रावासों के विद्यार्थियों को प्रतिमाह 200 रुपये की सहायता राशि भी उपलब्ध कराई जाती है। सरकार द्वारा विद्यार्थियों के अध्ययन वातावरण को बेहतर बनाने के लिए समाचार पत्र-पत्रिकाओं हेतु 5 हजार रुपये, इंटरनेट सुविधा के लिए 2500 रुपये तथा अध्ययन भ्रमण के लिए 25 हजार रुपये प्रतिवर्ष प्रदान किए जाते हैं। इसके अलावा छात्रावासों के संधारण एवं अनुरक्षण के लिए 50 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाती है।
जनजातीय विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए तैयार करने हेतु जिला एवं विकासखंड स्तर पर संचालित उत्कृष्ट छात्रावासों में 10 माह की विशेष कोचिंग व्यवस्था भी की गई है। इसमें विद्यार्थियों को पांच प्रमुख विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। साथ ही विद्यार्थियों को शिष्यवृत्ति के रूप में बालकों को 1650 रुपये तथा बालिकाओं को 1700 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं।
मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जनजातीय विद्यार्थियों को शिक्षा के हर क्षेत्र में आगे बढ़ाना और उन्हें समाज में बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के माध्यम से जनजातीय समाज को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।