इंदौर। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के प्रस्तावित पूर्वी बायपास प्रोजेक्ट और इंदौर-मनमाड़ रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध अब तेज होता जा रहा है। सोमवार को इंदौर कलेक्ट्रेट के बाहर गंजी कंपाउंड में किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया। भीषण गर्मी के बीच किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी।

प्रदर्शन के दौरान उस समय भावुक और चिंताजनक दृश्य देखने को मिला जब एक दिव्यांग किसान ने विरोध दर्ज कराने के लिए अर्द्धनग्न होकर तपती सड़क पर लोट लगाई। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को झकझोर कर रख दिया। किसानों का कहना है कि उनकी पुश्तैनी जमीनों का अधिग्रहण उनकी सहमति के बिना किया जा रहा है, जिससे उनका भविष्य और आजीविका दोनों खतरे में पड़ जाएंगे।
गर्मी बनी मुसीबत, दो किसानों की बिगड़ी तबीयत
लगातार धूप और गर्मी में प्रदर्शन कर रहे किसानों में से दो लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। एक किसान को चक्कर आने लगे, जिसके बाद मौके पर मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों ने उन्हें संभाला। बाद में एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत सामान्य बताई गई है।

धरने में शामिल किसान हजारीलाल को भी चक्कर आने की शिकायत हुई। कुछ देर आराम और उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार आया, लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों का हौसला कम नहीं हुआ और वे अपनी मांगों पर अड़े रहे।
महिलाओं और बच्चों ने भी संभाला मोर्चा
इस आंदोलन की खास बात यह रही कि इसमें केवल किसान ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार शामिल हुए। बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी धरना स्थल पर मौजूद रहे। कई परिवार अपने साथ राशन, आटा और अन्य जरूरी सामान लेकर पहुंचे हैं। किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो वे धरना स्थल पर ही भोजन बनाकर अनिश्चितकाल तक आंदोलन जारी रखेंगे।
धरने में मुख्य रूप से सिमरोल, तिल्लौर खुर्द, फरसपुर, खुड़ैल और आसपास के गांवों के किसान शामिल हुए। उनका आरोप है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर उनकी उपजाऊ कृषि भूमि छीनी जा रही है, जबकि उन्हें पर्याप्त जानकारी और न्यायसंगत समाधान नहीं दिया जा रहा।
“इस बार बिना समाधान नहीं हटेंगे”
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि वे पहले भी कई बार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन और ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। किसानों का आरोप है कि जैसे ही आंदोलन समाप्त होता है, प्रशासन उनकी समस्याओं को भूल जाता है।
किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि इस बार वे तब तक धरना समाप्त नहीं करेंगे, जब तक भूमि अधिग्रहण संबंधी दोनों परियोजनाओं पर स्पष्ट और स्थायी निर्णय नहीं लिया जाता। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका संघर्ष केवल जमीन बचाने का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का है।
प्रशासनिक अधिकारी करते रहे समझाइश
धरने की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों को समझाने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपने रुख पर कायम रहे।
अधिकारियों ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं और मांगों को शासन स्तर तक पहुंचाया जाएगा, लेकिन किसानों ने कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए।
हाईकोर्ट ने भी दिया था यथास्थिति बनाए रखने का आदेश
गौरतलब है कि पिछले महीने इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आया था। भारतीय किसान यूनियन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे। साथ ही एनएचएआई और जिला प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा गया था।

किसानों का कहना है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब तक किसी भी प्रकार की अधिग्रहण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
संघर्ष और विकास के बीच संतुलन की चुनौती
पूर्वी बायपास और इंदौर-मनमाड़ रेलवे लाइन जैसी परियोजनाएं क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं, लेकिन दूसरी ओर किसान अपनी जमीन और आजीविका बचाने के लिए संघर्षरत हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने विकास और किसानों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
फिलहाल किसानों का आंदोलन जारी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गर्मा सकता है। प्रशासन और किसानों के बीच सहमति बनती है या संघर्ष और तेज होता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।