मोबाइल अपडेट के बहाने 1.93 लाख की साइबर ठगी: लिंक पर क्लिक करते ही बंद हुआ फोन, खाते से उड़ गई रकम !

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इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है, जिसमें मोबाइल सॉफ्टवेयर अपडेट के नाम पर एक युवक के बैंक खाते से करीब 1.93 लाख रुपये निकाल लिए गए। घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए नए-नए तकनीकी तरीके अपना रहे हैं। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार हीरानगर थाना क्षेत्र के सुखलिया निवासी अंकित गुप्ता एक लॉजिस्टिक कंपनी में कार्यरत हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि जनवरी 2026 में उन्होंने नया स्मार्टफोन खरीदा था। 15 मई को उनके मोबाइल पर सिस्टम अपडेट का एक मैसेज आया। सामान्य प्रक्रिया समझते हुए उन्होंने फोन को अपडेट कर लिया। शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखाई दिया, लेकिन कुछ एप्लीकेशन ठीक तरह से काम नहीं कर रही थीं।

समस्या को दूर करने के लिए अंकित ने इंटरनेट पर उपलब्ध एक एप डाउनलोड कर लिया। एप इंस्टॉल करने के बाद दो दिन तक मोबाइल सामान्य रूप से चलता रहा, लेकिन 18 मई को अचानक फोन में तकनीकी दिक्कतें शुरू हो गईं। कुछ ही समय बाद मोबाइल पूरी तरह बंद हो गया।

अंकित ने बताया कि अगले दिन यानी 19 मई को वे मोबाइल को रिपेयरिंग के लिए सर्विस सेंटर लेकर गए। वहां से फोन ठीक होने के बाद जब उन्होंने अपने बैंक खाते की जानकारी चेक की तो उनके होश उड़ गए। खाते से लगभग 1 लाख 93 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए जा चुके थे।

बैंक स्टेटमेंट और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की जांच करने पर पता चला कि रकम अलग-अलग यूपीआई आईडी पर भेजी गई है। पीड़ित के अनुसार यह राशि अंकित कुमार और शिव शेखर नाम की यूपीआई आईडी पर ट्रांसफर की गई थी। खास बात यह है कि यह लेन-देन 18 मई को ही किया गया था, जब उनका मोबाइल तकनीकी रूप से प्रभावित हो चुका था।

मामले की शिकायत मिलने के बाद हीरानगर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब संबंधित यूपीआई खातों, बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार फर्जी अपडेट लिंक या संदिग्ध एप्लीकेशन के माध्यम से मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल कर दिया जाता है। इसके बाद अपराधी मोबाइल की जानकारी, बैंकिंग डिटेल्स और ओटीपी तक पहुंच बना लेते हैं। कई मामलों में रिमोट एक्सेस एप के जरिए फोन का नियंत्रण भी अपने हाथ में ले लिया जाता है।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि मोबाइल पर आने वाले किसी भी अनजान लिंक, अपडेट मैसेज या संदिग्ध एप्लीकेशन पर बिना जांच किए क्लिक न करें। यदि फोन में कोई तकनीकी समस्या आती है तो केवल अधिकृत सर्विस सेंटर या कंपनी के आधिकारिक प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें। साथ ही बैंक खाते से जुड़े लेन-देन पर नियमित निगरानी रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने को दें।

यह घटना एक बार फिर साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। थोड़ी सी लापरवाही भी लोगों की मेहनत की कमाई को पल भर में अपराधियों के हाथों पहुंचा सकती है।

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