दमोह – श्रुति मुद्रा एवं बुनियाद सांस्कृतिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में संवाद पुरुष मुन्ना शुक्ल संस्मरण ग्रंथ का भव्य विमोचन समारोह रविन्द्र भवन सभागार में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य स्व. मुन्ना शुक्ला के वैचारिक योगदान, सामाजिक संवाद और सांस्कृतिक चेतना को स्मरण करते हुए उनकी विचारधारा को नई पीढ़ी तक पहुँचाना था।
समारोह का शुभारंभ उनके पुत्र डॉ. सिद्धार्थ शंकर एवं पुत्रवधु डॉ. अलका शुक्ला ने स्वागत वक्तव्य से किया। प्रबंध संपादक उमाकांत मिश्र ने पुस्तक के प्रधान संपादक डॉ. छबिल मेहर का आभार व्यक्त किया और ग्रंथ के समय पर प्रकाशन के लिए डॉ. कविता शुक्ला को बधाई दी।

मुख्य अतिथि महापौर संगीता तिवारी ने कहा कि मुन्ना शुक्ला को लगभग हर विषय पर गहन और तथ्यात्मक ज्ञान था। विशिष्ट अतिथि पूर्व निदेशक स्टेट फॉरेंसिक लैब डॉ. हर्ष शर्मा ने बताया कि वे किसी भी विषय पर गहन चिंतन के बाद ही विचार रखते थे।
लेखिका डॉ. शरद सिंह ने शुक्लाजी के संवाद धर्मी स्वभाव, सामाजिक प्रतिबद्धता और सांस्कृतिक योगदान को रेखांकित किया। प्रो. दिनेश अत्रि ने कहा कि मुन्ना शुक्ला के विचार और व्यवहार आज भी शहर को दिशा दे रहे हैं। उनकी पुत्री और कथक नृत्यांगना डॉ. शांभवी शुक्ला ने संस्मरण ग्रंथ को अनुपम धरोहर बताते हुए अपने पिता को ऋषि और दृष्टा कहा तथा “पिता” शीर्षक से मार्मिक कविता पाठ कर सभागार को भावुक कर दिया।
समारोह में प्रसिद्ध सितार वादक डॉ. गोपाल कृष्ण शाह (दिल्ली विश्वविद्यालय) ने राग पूरिया धनाश्री में उत्कृष्ट सितार वादन प्रस्तुत किया, जबकि तबला संगत उजित उदय कुमार ने साथ निभाई।
कार्यक्रम ने मुन्ना शुक्ला के विचारों और सांस्कृतिक योगदान को सम्मानित करते हुए नई पीढ़ी में संवाद और संवेदनशीलता की प्रेरणा दी।