प्रशासनिक अधिकारी पर छात्रा से मारपीट का आरोप: एफआईआर में देरी से भड़का छात्र संगठन !

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छतरपुर। जिले में एक छात्रा के साथ कथित मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारी पर थप्पड़ मारने और अभद्रता करने के आरोपों के विरोध में छात्र संगठनों एवं आम नागरिकों में गहरा आक्रोश है। घटना के चार दिन बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज न होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

3 दिसंबर को शुरू हुआ विवाद

घटना 3 दिसंबर की है। एमए की छात्रा गुड़िया पटेल खाद लेने के लिए सटई रोड स्थित कृषि उपज मंडी गई थीं। वहाँ नायब तहसीलदार रितु सिंह किसानों को टोकन बांट रही थीं। छात्रा ने टोकन एवं खाद वितरण के संबंध में जानकारी मांगी, जिस पर अधिकारी कथित रूप से भड़क गईं और छात्रा को थप्पड़ मार दिया।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो सामने आने के बाद कलेक्टर ने नायब तहसीलदार रितु सिंह को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया था।

एसडीएम और तहसीलदार पर भी आरोप

छात्र संगठनों ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचे एसडीएम अखिल राठौर और तहसीलदार आकाश नीरज ने भी छात्रा समेत लाइन में खड़ी महिलाओं के साथ गाली-गलौज और अभद्रता की। उन पर धमकाने और जेल भेजने की बात कहने के भी आरोप लगे हैं।

संगठनों ने दावा किया कि प्रशासन ने बाद में अपने बचाव में छात्रा पर दबाव डालकर एक वीडियो बयान भी जारी करवाया, ताकि मामले को शांत किया जा सके।

कलेक्ट्रेट घिरा, कार्रवाई की मांग

सोमवार दोपहर लगभग 3 बजे ABVP, NSUI और अन्य छात्र संगठनों के कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर पार्थ जैसवाल को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में सभी संबंधित अधिकारियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज करने और निलंबन की कार्रवाई की मांग की गई।

छात्र संगठनों की चेतावनी

एनएसयूआई जिलाध्यक्ष विवेक अग्रवाल ने कहा कि सभी दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, अन्यथा कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
छात्र नेता सत्येंद्र शर्मा ने इस घटना को “किसान की बेटी का अपमान, बाल पकड़कर थप्पड़ मारना और महिलाओं का मानमर्दन” बताते हुए इसे गंभीर अपराध कहा।

सभी छात्र संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी—
🔹 यदि 3 दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।


अभी सबसे बड़ा सवाल…

📌 वीडियो वायरल होने, शिकायत दर्ज होने और ज्ञापन सौंपे जाने के बाद भी — कार्रवाई में देरी क्यों?
📌 क्यों अब तक किसी अधिकारी पर एफआईआर नहीं?
📌 छात्र संगठनों के आंदोलन के बाद क्या प्रशासन हरकत में आएगा?

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