बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई: गंभीर अनियमितताओं पर जनपद पंचायत बिजावर की सीईओ निलंबित !

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प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए संभाग कमिश्नर श्री अनिल सुचारी ने छतरपुर जिले की जनपद पंचायत बिजावर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) श्रीमती अंजना नागर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कलेक्टर छतरपुर द्वारा प्रस्तुत विस्तृत प्रतिवेदन के आधार पर की गई, जिसमें कई गंभीर अनियमितताओं, शासकीय निर्देशों के उल्लंघन और अनुशासनहीनता के आरोप सामने आए थे।

वित्तीय अनियमितताओं का मामला आया सामने

जांच प्रतिवेदन के अनुसार, श्रीमती अंजना नागर द्वारा ग्राम पंचायत अनगौर में स्वीकृत “नंदन फलोद्यान” योजना के अंतर्गत बिना कार्य कराए ही नियमों के विरुद्ध भुगतान कर दिया गया। यह मामला सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता और शासन के धन के दुरुपयोग से जुड़ा है, जिसे प्रशासन ने गंभीरता से लिया।

मुख्यालय पर अनुपस्थिति और रिकॉर्ड में गड़बड़ी

प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित अधिकारी नियमित रूप से अपने मुख्यालय पर निवास नहीं कर रही थीं। इसके अलावा, उनके द्वारा उपयोग किए जा रहे अनुबंधित वाहन से संबंधित आवश्यक अभिलेख जैसे लॉगबुक, पीओएल (पेट्रोल-ऑयल-लुब्रिकेंट) रिकॉर्ड और टूर डायरी भी संधारित नहीं पाई गई। यह प्रशासनिक लापरवाही और कार्यप्रणाली में गंभीर कमी को दर्शाता है।

शासकीय निर्देशों की अनदेखी

जांच में यह भी सामने आया कि जनपद पंचायत बक्स्वाहा के ग्राम रोजगार सहायकों को संपर्कता सर्वे का मानदेय भुगतान नहीं किया गया, जो सीधे तौर पर शासन के निर्देशों का उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त, बिना सक्षम आदेश के ग्राम रोजगार सहायकों को जनपद पंचायत में संबद्ध कर दिया गया, जो नियमों के विपरीत है।

अनियमित नियुक्तियां और भुगतान

कार्यालय जनपद पंचायत नौगांव के एक आदेश के माध्यम से अन्य विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों—श्री संतोष सिंह (लेखापाल) और श्री शिवदयाल अरजरिया (पीसीओ)—को आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में संबद्ध कर उन्हें पारिश्रमिक का भुगतान किया जा रहा था। यह प्रक्रिया भी नियमों के अनुरूप नहीं पाई गई।

अनाधिकृत अनुपस्थिति के बावजूद जॉइनिंग

एक अन्य गंभीर मामला सहायक ग्रेड-3 श्री आकाश शर्मा से जुड़ा है, जिन्हें लगभग 3 वर्ष 9 माह तक अनाधिकृत अनुपस्थिति के बावजूद नियमों के विपरीत पुनः जॉइन करा लिया गया। यह निर्णय भी प्रशासनिक नियमों की अनदेखी को दर्शाता है।

लोकायुक्त निर्देशों की अवहेलना

श्रीमती अंजना नागर को लोकायुक्त कार्यालय भोपाल में 20 जनवरी 2026 को उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन वे निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं हुईं। इसके अलावा, 24 फरवरी 2026 को जारी कारण बताओ नोटिस का भी उन्होंने कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया। यह व्यवहार प्रशासनिक अनुशासन के विपरीत माना गया।

प्रथम दृष्टया दोषी पाई गईं अधिकारी

कलेक्टर छतरपुर द्वारा 1 अप्रैल 2026 को प्रस्तुत प्रस्ताव के परीक्षण के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि श्रीमती नागर प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होती हैं। उनके कार्यों को स्वेच्छाचारिता, लापरवाही और अनुशासनहीनता का प्रतीक माना गया है।

नियमों के तहत की गई कार्रवाई

संभाग कमिश्नर द्वारा यह कार्रवाई मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के उल्लंघन के आधार पर की गई है। साथ ही म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9 के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

प्रशासन का सख्त संदेश

इस कार्रवाई के माध्यम से प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कदम न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा, बल्कि अन्य अधिकारियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है।

निष्कर्ष

जनपद पंचायत बिजावर की सीईओ के खिलाफ की गई यह कार्रवाई प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे यह स्पष्ट होता है कि शासन स्तर पर नियमों के पालन को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों से प्रशासनिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

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