सागर जिले की महत्वाकांक्षी बण्डा वृहद सिंचाई परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। परियोजना के अंतर्गत बण्डा बाँध के नाला क्लोजर का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है और प्रशासन ने आगामी मानसून को देखते हुए सुरक्षा एवं विस्थापन की तैयारियां तेज कर दी हैं। जल संसाधन विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि नाला क्लोजर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाँध के जल भराव क्षेत्र में आने वाली जमीन, आबादी और अन्य परिसंपत्तियां पूरी तरह डूब क्षेत्र में आ जाएंगी। इसे देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए मिशन मोड में कार्रवाई शुरू कर दी है।
Pratibha Pal ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वर्षाकाल शुरू होने से पहले सभी प्रभावित परिवारों का सुरक्षित पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। प्रशासन का कहना है कि मानसून के दौरान जल स्तर तेजी से बढ़ सकता है, इसलिए किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से बचने के लिए समय रहते विस्थापन आवश्यक है।
परियोजना कार्यालय, बीना पीएमयू जल संसाधन विभाग सागर से प्राप्त जानकारी के अनुसार मिट्टी बाँध का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और शेष निर्माण कार्य को 31 मई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि नाला क्लोजर के बाद जल भराव की स्थिति तेजी से बन सकती है, इसलिए पुनर्वास कार्य में किसी प्रकार की देरी नहीं की जाएगी।

प्रशासन ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों को संयुक्त रूप से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। तहसील बण्डा और मालथौन के अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित कर प्रभावित परिवारों को तय समय सीमा में पुनर्वास कॉलोनियों में शिफ्ट कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन लगातार प्रभावित गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद भी कर रहा है।
इस परियोजना के कारण कुल 14 गांवों की आबादी प्रभावित हो रही है। इनमें बण्डा तहसील के बहरोल, उल्दन, सलैया खुर्द, पिपरिया इल्लाई, हनौता उवारी, बमूरा बिनैका, कुल्ल, किरोला, कोटिया और सेमरा अहीर गांव शामिल हैं। वहीं मालथौन तहसील के पहरगुवां, मुडिया गुसाई, पिथौली और नेतना गांव भी डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। इन गांवों के प्रभावित परिवारों को मुख्य रूप से पुनर्वासन कॉलोनी ग्राम पनारी और ग्राम पिथौली में बसाया जा रहा है।
आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष कुल 386 मकान और अन्य संरचनाएं प्रभावित हो रही हैं। इनमें 312 स्थायी और 74 अस्थायी संरचनाएं शामिल हैं। प्रशासन द्वारा पुनर्वास कॉलोनियों में आवास निर्माण और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था लगातार की जा रही है ताकि विस्थापित परिवारों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने डूब क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों से प्रशासनिक कार्रवाई में सहयोग करने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि समय रहते सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होने से वर्षाकाल के दौरान संभावित दुर्घटनाओं और असुविधाओं से बचा जा सकेगा। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि पुनर्वास प्रक्रिया के दौरान सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और प्रभावित परिवारों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
बण्डा वृहद सिंचाई परियोजना को क्षेत्र की कृषि और सिंचाई व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद हजारों किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। हालांकि, इसके साथ ही प्रभावित गांवों के पुनर्वास की चुनौती भी प्रशासन के सामने है, जिसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।