बसाहरी पंचायत में योजनाओं का बड़ा घोटाला, बिना काम निकाली गई राशि !

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सागर। सागर जिले की खुरई जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली बसाहरी ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना, खेत तालाब योजना और व्यक्तिगत शौचालय निर्माण योजना में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई हितग्राहियों के नाम पर सरकारी योजनाओं की राशि निकाल ली गई, जबकि मौके पर कार्य नहीं हुए। इतना ही नहीं, सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी में भी कथित रूप से अधूरी और भ्रामक जानकारी उपलब्ध कराई गई। मामले के सामने आने के बाद ग्रामीणों ने जनपद पंचायत और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मामला खुरई से लगभग 27 किलोमीटर दूर स्थित बसाहरी ग्राम पंचायत का है। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में वर्षों से विभिन्न योजनाओं के नाम पर अनियमितताएं की जा रही हैं। आरटीआई कार्यकर्ता प्रताप सिंह राजपूत ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन किया था, लेकिन आज तक उन्हें आवास स्वीकृत नहीं हुआ। अगस्त 2025 में पंचायत के रोजगार सहायक नरेश कुर्मी द्वारा उन्हें यह कहते हुए अपात्र घोषित कर दिया गया कि वे योजना की पात्रता नहीं रखते।

प्रताप सिंह का कहना है कि बाद में सूचना के अधिकार के तहत पंचायत से जानकारी मांगी गई। 30 अप्रैल 2026 को जो जानकारी उपलब्ध कराई गई, वह अधूरी थी। इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच की, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिकॉर्ड के अनुसार गांव के कई लोगों के नाम पर प्रधानमंत्री आवास, खेत तालाब और शौचालय निर्माण की राशि निकाली जा चुकी थी, जबकि संबंधित हितग्राहियों को इसकी जानकारी तक नहीं थी।

ग्रामीण अशोक चढ़ार ने बताया कि उनके पिता भागीरथ चढ़ार के नाम पर खेत तालाब योजना स्वीकृत हुई थी। रिकॉर्ड में करीब 2 लाख 59 हजार 374 रुपए की राशि निकाली जाना दर्शाया गया है। जब उनके खेत का निरीक्षण किया गया तो वहां तालाब तो दूर, खुदाई का कोई निशान तक नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि भौतिक सत्यापन में भी यह तथ्य सामने आ चुका है कि कार्य नहीं हुआ, जबकि भुगतान पूरा दिखाया गया है।

इसी प्रकार गांव के निवासी कल्लू कुर्मी का प्रधानमंत्री आवास अभी भी अधूरा है, लेकिन दस्तावेजों में निर्माण कार्य पूर्ण दिखाया गया है। आरोप है कि आवास निर्माण के नाम पर करीब 1 लाख 20 हजार रुपए की राशि निकाल ली गई। हितग्राही का कहना है कि निर्माण कार्य अभी भी पूरा नहीं हुआ है और उन्हें योजना की पूरी राशि का लाभ नहीं मिला।

शौचालय योजना में भी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। हरप्रसाद अहिरवार ने बताया कि उनके घर में आज तक शौचालय का निर्माण नहीं हुआ, लेकिन रिकॉर्ड में 12 हजार रुपए की राशि भुगतान होना दर्ज है। इसी तरह कुंदनलाल कुर्मी का कहना है कि उन्होंने शौचालय निर्माण के लिए आवेदन किया था। काफी समय तक राशि नहीं मिलने पर उन्होंने स्वयं के खर्च से शौचालय बनवा लिया। बाद में पता चला कि उनके नाम पर स्वीकृत 12 हजार रुपए पहले ही निकाले जा चुके हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार सहायक ने हितग्राहियों की जानकारी के बिना दस्तावेज तैयार कर सरकारी राशि का भुगतान दर्शाया और योजनाओं का लाभ कागजों में वितरित कर दिया। गांव के लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

आरोप केवल योजनाओं में गड़बड़ी तक सीमित नहीं हैं। ग्रामीणों का दावा है कि रोजगार सहायक ने अपने परिचितों और रिश्तेदारों को भी योजनाओं का लाभ पहुंचाया। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार कुछ लोगों के नाम पर आवास स्वीकृत कर राशि निकाली गई, लेकिन मौके पर निर्माण कार्य नहीं मिला। ग्रामीणों ने पंचायत के संबंधित अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।

मामले की शिकायत 19 मई को सागर कलेक्टर, खुरई एसडीएम और जनपद पंचायत सीईओ को की गई थी। शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। खुरई जनपद पंचायत की प्रभारी सीईओ मीना कश्यप ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जा रही है। समिति पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं पंचायत इंस्पेक्टर रामलाल रोहित ने कहा कि जांच दल जल्द ही गांव पहुंचकर दस्तावेजों और भौतिक स्थिति का परीक्षण करेगा। यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी ओर रोजगार सहायक नरेश कुर्मी ने सभी आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि खेत तालाब निर्माण से जुड़ा मामला सीमांकन विवाद के कारण उलझा हुआ है। शौचालय और आवास संबंधी योजनाओं में भी नियमानुसार कार्य किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में राशि हितग्राहियों के खातों में भेजी गई है और लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।

फिलहाल मामला जांच के अधीन है। ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला ग्रामीण विकास योजनाओं में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता का उदाहरण बन सकता है। वहीं प्रशासन का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और शासन की योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।

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