भोपाल मेट्रो की कमर्शियल सेवा शुरू करने की तैयारियां जोरों पर हैं। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) के ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद अब प्रायोरिटी कॉरिडोर पर 21 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो को हरी झंडी दिखा सकते हैं।
इस बीच मेट्रो स्टेशन और आसपास के एरिया को व्यवस्थित किया जा रहा है ताकि यात्रियों को कोई दिक्कत न हो। ऑरेंज लाइन का प्रायोरिटी कॉरिडोर 6.22 किलोमीटर लंबा है, जिसमें कुल 8 स्टेशन शामिल हैं: सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स।


केंद्रीय स्कूल स्टेशन में खुदाई, ऊंचाई बढ़ाई गई
केंद्रीय स्कूल मेट्रो स्टेशन (आरबीआई के सामने) की ऊंचाई तय मानक से कम रहने के कारण भारी वाहनों के फंसने का खतरा था। इसके लिए सड़क की खुदाई कर स्टेशन की ऊंचाई बढ़ाई गई। करीब 15 दिन तक रास्ता डायवर्ट किया गया और डामरीकरण कर दिया गया है। हालांकि, साइड लेन अभी भी उबड़-खाबड़ है, जिसे सुधारने का काम जारी है।
सुभाष नगर स्टेशन और अन्य स्टेशनों पर भी काम जारी
सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन के फुटओवर ब्रिज के नीचे एमपी नगर-बोगदा पुल आने-जाने के लिए दूसरी सड़क बनाई जा रही है।
डीबी मॉल स्टेशन पर एंटर-एक्जिट एरिया समतल किया जा रहा है। रानी कमलापति स्टेशन पर लाइटिंग का काम और डीआरएम तिराहा, एम्स तथा अलकापुरी में स्टेशन के बाहर के काम पूरे किए जा रहे हैं।
केंद्रीय स्कूल स्टेशन पर दिव्यांगजनों के लिए विशेष पार्किंग भी बनाई गई है।
भोपाल मेट्रो का इतिहास और प्रगति
भोपाल में पहला मेट्रो रूट एम्स से करोंद तक 16.05 किलोमीटर लंबा है। इस रूट का प्राथमिकता कॉरिडोर एम्स से सुभाष नगर तक 6.22 किलोमीटर में 2018 में शुरू हुआ था। सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा रेलवे ट्रैक के ऊपर दो स्टील ब्रिज बनाए गए हैं।
पहली बार मेट्रो 3 अक्टूबर 2023 को ट्रायल के तौर पर चली थी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक मेट्रो का सफर किया।
भोपाल मेट्रो की कमर्शियल सेवाओं के शुरू होने के बाद राजधानीवासियों को सुरक्षित, तेज और आधुनिक परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है।