45 डिग्री गर्मी में सड़क की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण: जमीन पर बैठकर किया प्रदर्शन, बोले- अब सिर्फ आश्वासन नहीं समाधान चाहिए !

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छतरपुर।
छतरपुर जिले के महाराजपुर क्षेत्र अंतर्गत मढ़ा पुरवा गांव के ग्रामीणों ने सोमवार को मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। भीषण नौतपा और करीब 45 डिग्री तापमान के बीच बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, बुजुर्ग और स्कूली छात्र जमीन पर बैठकर करीब एक घंटे तक धरने पर डटे रहे। ग्रामीणों की मुख्य मांग गांव तक पक्की सड़क निर्माण और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की थी।

प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी उनका गांव सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। बरसात के दिनों में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से लगभग कट जाता है। कीचड़ और दलदल के कारण स्कूली बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है।

ग्रामीणों ने बताया कि कई बार ऐसी स्थिति बनती है जब गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को खाट या ट्रैक्टर के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने से उनका गांव विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह कट गया है।

“कई बार दिए ज्ञापन, लेकिन नहीं हुई सुनवाई”

धरने के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि वे कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। समस्या का समाधान आज तक नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने कहा कि जब बार-बार शिकायत और मांग के बाद भी सुनवाई नहीं हुई, तो मजबूर होकर उन्हें कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई चाहते हैं।

कलेक्टर के नहीं आने से बढ़ी नाराजगी

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों को उम्मीद थी कि कलेक्टर स्वयं बाहर आकर उनकी समस्या सुनेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी जब कलेक्टर प्रदर्शन स्थल पर नहीं पहुंचे, तो ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई।

बाद में एसडीएम और तहसीलदार मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से ज्ञापन लेने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों ने ज्ञापन देने से इनकार कर दिया।

ग्रामीणों का कहना था कि जब तक जिम्मेदार अधिकारी स्वयं सामने आकर उनकी समस्या नहीं सुनेंगे और ठोस आश्वासन नहीं देंगे, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि अब वे केवल औपचारिक कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होंगे।

छात्र बोले- खराब रास्तों से पढ़ाई हो रही प्रभावित

प्रदर्शन में शामिल स्कूली छात्र-छात्राओं ने भी अपनी परेशानी साझा की। छात्रों ने बताया कि सड़क खराब होने के कारण उन्हें रोजाना कीचड़ और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर स्कूल जाना पड़ता है।

बरसात के समय स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है, जिससे कई दिनों तक स्कूल पहुंचना संभव नहीं हो पाता। छात्रों का कहना था कि सड़क नहीं होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कई बार दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।

छात्रों ने प्रशासन से जल्द सड़क निर्माण कराने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा तक पहुंच हर बच्चे का अधिकार है, लेकिन खराब सड़क उनके भविष्य के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन चुकी है।

भीषण गर्मी में पानी के कैंपर लेकर पहुंचे ग्रामीण

नौतपा की भीषण गर्मी के बीच प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण अपने साथ पानी के कैंपर, बोतलें और डिब्बे लेकर पहुंचे थे। कलेक्ट्रेट परिसर में तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच लोग जमीन पर बैठे रहे।

महिलाएं और बुजुर्ग भी आंदोलन में बड़ी संख्या में शामिल रहे। गर्मी के बावजूद लोगों का उत्साह और आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था। कई ग्रामीणों ने कहा कि जब गांव में वर्षों से परेशानी झेल रहे हैं, तो अब आवाज उठाना जरूरी हो गया है।

“अब आंदोलन और तेज होगा”

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सड़क निर्माण और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की गई, तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। उनका कहना है कि वे लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं और अब चुप बैठने वाले नहीं हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि गांव में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवागमन जैसी बुनियादी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे। ऐसे में मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

प्रशासन पर बढ़ा दबाव

प्रदर्शन के बाद प्रशासन पर अब समाधान निकालने का दबाव बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते गांव की सड़क और अन्य समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र हो सकता है।

महाराजपुर क्षेत्र के ग्रामीणों का यह प्रदर्शन अब केवल सड़क निर्माण की मांग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक उदासीनता का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

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