देश का पहला टाइगर रिजर्व बनेगा जहां एक साथ रहेंगे टाइगर, तेंदुआ और चीता !

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मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) अब चीतों के पुनर्वास के लिए तैयार है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने इस परियोजना के लिए 5.20 करोड़ रुपए का बजट जारी किया है। इस राशि से चीतों के लिए चार क्वारंटाइन बोमा और चार सॉफ्ट रिलीज बोमा तैयार किए जा रहे हैं।

चीतों की बसाहट की शुरुआत मुहली रेंज से

प्रारंभ में मुहली रेंज में क्वारंटाइन बोमा का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। यहां पर चीतों के लिए सुरक्षित बाड़े, बाड़बंदी, घास के मैदान का प्रबंधन और सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की जा रही है। ये कैमरे चीतों की हर गतिविधि पर नज़र रखेंगे। अधिकारियों का मानना है कि अगले साल तक चीतों को यहां स्थानांतरित किया जा सकता है।

चीतों के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में पहले से ही चीतों के प्राकृतिक आवास के प्रमाण मिले हैं। यहां खुले घास के मैदान, पर्याप्त शिकार जैसे चीतल, चिंकारा और काले हिरण उपलब्ध हैं। यही वजह है कि यहां संघर्ष की संभावना बहुत कम है। रिजर्व का कोर एरिया 1414 वर्ग किमी और बफर एरिया 925.12 वर्ग किमी है। कुल मिलाकर 2339 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला यह प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है।

चीता प्रोजेक्ट की टीम ने किया था निरीक्षण

चीता पुनर्वास योजना के तहत भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) देहरादून और NTCA के अधिकारियों की एक टीम ने 1 से 3 मई के बीच टाइगर रिजर्व का विस्तृत निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद उन्होंने मुहली, सिंहपुर और झापन रेंज को चीतों की बसाहट के लिए सबसे उपयुक्त पाया। इसके बाद ही यहां चीतों की शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

क्या होते हैं क्वारंटाइन और सॉफ्ट रिलीज बोमा?

बोमा’ अफ्रीकी तकनीक है, जिसका इस्तेमाल वन्यजीवों को सुरक्षित पकड़ने और स्थानांतरित करने में किया जाता है।

  • क्वारंटाइन बोमा: इसमें नए आने वाले चीतों को अस्थायी रूप से रखा जाता है ताकि उनका स्वास्थ्य परीक्षण और अनुकूलन हो सके। यहां सीसीटीवी कैमरे और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी रखती है।
  • सॉफ्ट रिलीज बोमा: क्वारंटाइन अवधि पूरी करने के बाद चीतों को इस बड़े क्षेत्र में छोड़ा जाता है, जहां वे शिकार करना सीखते हैं और प्राकृतिक वातावरण के साथ तालमेल बैठाते हैं। यहां चीतल, नीलगाय जैसे जानवर छोड़े जाते हैं ताकि चीते स्वयं शिकार कर सकें।

टाइगर, तेंदुआ और चीता — एक साथ

चीतों की शिफ्टिंग पूरी होने के बाद यह देश का पहला टाइगर रिजर्व होगा, जहां तीनों बड़े शिकारी — टाइगर, तेंदुआ और चीता एक साथ रहेंगे। इससे यह सिद्ध होगा कि ये तीनों प्रजातियां एक ही पारिस्थितिकी तंत्र में सहअस्तित्व रख सकती हैं। वर्तमान में यहां बाघ, तेंदुआ, भेड़िया और सियार पहले से मौजूद हैं।

कूनो से पहले तय था नौरादेही

चीतों के पुनर्वास की पहल जब 2010 में शुरू हुई थी, तब नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य को ही इस प्रोजेक्ट के लिए सबसे पहले चुना गया था। वैज्ञानिक सर्वेक्षण में यहां की तीन रेंज — मुहली, सिंहपुर और झापन को उपयुक्त माना गया था। हालांकि बाद में कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बसाहट पहले की गई। अब वही योजना फिर से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में लागू की जा रही है।

1975 से अब तक का सफर

नौरादेही अभयारण्य की स्थापना 1975 में हुई थी, जिसका क्षेत्रफल तब 1197 वर्ग किमी था। वर्ष 2023 में इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला और इसका नाम बदलकर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व रखा गया। अब इसका कुल क्षेत्रफल बढ़कर 2339 वर्ग किमी हो चुका है।

प्रदेश का गौरव बनेगा नौरादेही

चीतों की शिफ्टिंग के साथ यह टाइगर रिजर्व न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय होगा। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जैव विविधता और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र इसे एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के संरक्षण मॉडल के रूप में स्थापित करेगा।

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