झाबुआ में यूरिया की किल्लत पर प्रशासन एक्शन में: आज तीन केंद्रों पर वितरण, किसानों को मिली राहत !

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झाबुआ जिले में यूरिया की कमी को लेकर बढ़ रही नाराज़गी के बीच जिला प्रशासन ने वितरण व्यवस्था में बड़े सुधार किए हैं। पेटलावद में शनिवार को किसानों के प्रदर्शन के बाद कलेक्टर नेहा मीना ने अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए थे। निर्देशों का असर सोमवार को दिखाई दिया, जब कई केंद्रों पर यूरिया का सुव्यवस्थित वितरण शुरू हुआ।

किसानों का प्रदर्शन, फिर मिला आश्वासन

शनिवार को पेटलावद में यूरिया न मिलने से नाराज़ किसानों का गुस्सा फूट पड़ा था। लंबी कतारों में खड़े किसानों ने प्रदर्शन किया और प्रशासन पर cवितरण में अनियमितता का आरोप लगाया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद किसानों ने सोमवार तक के लिए धरना स्थगित कर दिया था।

आज तीन केंद्रों पर वितरण

सोमवार सुबह से ही

  • पेटलावद,
  • करड़ावद,
  • सारंगी
    में यूरिया का वितरण शुरू कर दिया गया है।

उप संचालक, किसान कल्याण एवं कृषि विकास डॉ. नगीनसिंह रावत ने बताया कि किसानों को उनकी आवश्यकता अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। जिले में उर्वरक का भंडारण और वितरण कार्य तेजी से जारी है।

कई माध्यमों से उपलब्ध कराया जा रहा उर्वरक

डॉ. रावत के अनुसार—

  • मेघनगर, थांदला, झाबुआ, रामा और पारा में नकद विक्रय केंद्रों के माध्यम से यूरिया उपलब्ध है।
  • 46 सहकारी समितियों में परमिट सिस्टम के जरिए वितरण किया जा रहा है।
  • जिले में अब तक उपलब्ध कराए गए उर्वरक:
    • यूरिया – 18002 MT
    • DAP – 4000 MT
    • SSP – 2515 MT
    • MOP – 504 MT
    • NPK – 6317 MT

इनमें से

  • 16611 MT यूरिया,
  • 2794 MT DAP,
  • 2966 MT SSP,
  • 256 MT MOP
    वितरित किया जा चुका है। वर्तमान में 1391 MT यूरिया स्टॉक में है।

जिले को NFL और IFFCO की दो रेकों के माध्यम से यूरिया प्राप्त हुआ है, जिससे आपूर्ति में तेजी आई है।

किसानों से अपील

प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी तत्काल जरूरत के अनुसार नजदीकी

  • सहकारी समितियों,
  • विपणन संघ के केंद्रों,
  • निजी विक्रेताओं
    से नकद में यूरिया खरीदें।

साथ ही निर्देश है कि सभी विक्रेता POS मशीन के माध्यम से ही उर्वरक का वितरण करेंगे, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।

झाबुआ में प्रशासन की सक्रियता से फिलहाल किसानों को बड़ी राहत मिली है, हालांकि मांग बढ़ने और फसल सीजन को देखते हुए आगे भी सतत निगरानी की जरूरत बनी रहेगी।

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