सीहोर, शुक्रवार – वीआईटी (वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) यूनिवर्सिटी में छात्रों के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ का मामला सामने आया है। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि हॉस्टल और कैंपस में परोसे जा रहे भोजन में कीटनाशक और इंसेक्टिसाइड के अवशेष पाए गए हैं। दाल, चावल, राजमा, आटा और मैदा जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ अनसेफ घोषित किए गए हैं।

पिछले कुछ समय से छात्रों में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और बुखार जैसी शिकायतें बढ़ी हुई थीं। शिकायतों के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की टीम कैंपस पहुंची और 5 कैटर्स द्वारा परोसे जा रहे भोजन के कुल 32 सैंपल लिए। रिपोर्ट में 12 सैंपल सीधे तौर पर अनसेफ पाए गए, जबकि कई अन्य सैंपल सब-स्टैंडर्ड श्रेणी में रहे।
जांच में यह भी सामने आया कि यूनिवर्सिटी में भोजन उपलब्ध कराने वाले 5 कैटर्स में से 4 के सैंपल फेल हो गए। फेल कैटर्स में जेएमबी कैटरर्स, रेसेंस प्राइवेट लिमिटेड, ए.बी. कैटरिंग और सफल सिनर्जी शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर सैंपल फेल होना भोजन की गुणवत्ता और सप्लाई चेन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह का अनसेफ फूड खाने से दस्त, उल्टी, पेट में तेज दर्द, बुखार, फूड प्वाइजनिंग, टाइफाइड और लिवर से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक पेस्टीसाइड युक्त भोजन का सेवन युवाओं में स्थायी दुष्प्रभाव भी डाल सकता है।
मध्यप्रदेश एफडीए ने कहा कि कैंटीन संचालन कर रहे चारों कैटर्स के फूड लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे। दोषियों के खिलाफ 10 लाख रुपए तक जुर्माना और 3 साल तक की जेल का प्रावधान है। सब-स्टैंडर्ड मामलों की सुनवाई एडीएम कोर्ट में होगी।
एफडीए ने छात्रों और अभिभावकों को चेताया है कि कैंपस में परोसा जाने वाला भोजन सुरक्षित नहीं है और यूनिवर्सिटी प्रबंधन तथा कैटर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।