सागर संभाग के कमिश्नर श्री अनिल सुचारी द्वारा देवरी विकासखंड के उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण प्रशासनिक सक्रियता और किसानों के हितों के प्रति संवेदनशीलता का स्पष्ट संकेत है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उपार्जन केंद्रों पर सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं और किसानों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा जाए। यह पहल न केवल खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगी, बल्कि किसानों का विश्वास भी मजबूत करेगी।
कमिश्नर ने अपने दौरे के दौरान विभिन्न विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों का स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने उपार्जन केंद्रों की कार्यप्रणाली, किसानों को मिलने वाली सुविधाओं और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी योजनाओं की गहन समीक्षा की। यह निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं था, बल्कि मौके पर ही सुधारात्मक कदम उठाने की दिशा में एक गंभीर प्रयास था।

मूलभूत सुविधाओं पर विशेष जोर
ग्राम बरकोटीकलॉ स्थित माँ हरसिद्धि वेयरहाउस में संचालित गेहूँ खरीदी केंद्र के निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने व्यवस्थाओं का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही केंद्र पर साफ-सफाई, पंखों की उपलब्धता और समुचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। गर्मी के मौसम में यह सुविधाएं किसानों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं, इसलिए इन पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
पारदर्शिता और तकनीकी प्रक्रिया को बढ़ावा
कमिश्नर श्री सुचारी ने खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक बोरी पर पंजीयन क्रमांक स्पष्ट रूप से अंकित किया जाए। तुलाई के तुरंत बाद डेटा फीडिंग कर किसानों को पावती प्रदान की जाए, ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी या देरी न हो। इस कदम से न केवल प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम होंगी।
नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय
निरीक्षण के दौरान यह भी निर्देश दिया गया कि नोडल अधिकारी नियमित रूप से उपार्जन केंद्रों पर उपस्थित रहें। किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा बारदाना और परिवहन से संबंधित जानकारी प्रतिदिन जिला कार्यालय को भेजने के निर्देश भी दिए गए। एसडीएम और तहसीलदार को सतत निगरानी रखने के लिए कहा गया, जिससे खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।

ग्रामीण आजीविका के मॉडल का निरीक्षण
कमिश्नर का दौरा केवल उपार्जन केंद्रों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने बीना बारहा स्थित श्रमदान हथकरघा केंद्र का भी निरीक्षण किया। यह केंद्र समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर शिक्षा से वंचित और नशा प्रभावित लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। यह पहल सामाजिक पुनर्वास और आर्थिक सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी प्रयास
श्रमदान हथकरघा केंद्र में लगभग 650 लोग कार्यरत हैं, जिनमें 350 महिलाएं शामिल हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि यह केंद्र महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां धागा निर्माण से लेकर कपड़ा बुनाई और सिलाई तक का कार्य किया जाता है। तैयार उत्पाद “श्रमदान ब्रांड” के नाम से बाजार में बेचे जाते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।

स्वावलंबन की दिशा में प्रेरणादायक पहल
इस केंद्र की सबसे खास बात यह है कि यह केवल रोजगार ही नहीं देता, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी देता है। जो लोग पहले समाज की मुख्यधारा से कटे हुए थे, वे अब अपने कौशल के बल पर सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है।
प्रशासन की सक्रियता से बढ़ेगा भरोसा
कमिश्नर का यह दौरा दर्शाता है कि प्रशासन अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इससे किसानों और आम नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास बढ़ेगा।
देवरी विकासखंड में किया गया यह निरीक्षण केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधार की दिशा में एक ठोस कदम है। उपार्जन केंद्रों पर सुविधाओं में सुधार, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देना—ये सभी पहलें क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। यदि इसी प्रकार प्रशासनिक सक्रियता बनी रहती है, तो निश्चित रूप से किसानों और ग्रामीणों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा।