मध्यप्रदेश के खुरई क्षेत्र से एक दर्दनाक और चिंताजनक घटना सामने आई है, जिसने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है। मालथौन थाना क्षेत्र के भेलैया गांव में एक भैंस की मौत बिजली के टूटे तार की चपेट में आने से हो गई। इस घटना ने न केवल पशुपालक को गहरे आर्थिक संकट में डाल दिया है, बल्कि पूरे गांव में भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।
घटना उस समय हुई जब पशुपालक हनुमंत पिता अनंत सिंह लोधी (32) अपनी भैंस को रोज की तरह खेतों में चराने के लिए ले गए थे। जानकारी के अनुसार, चरते-चरते भैंस पास के खेत में चली गई, जो नूर अहमद खान का बताया जा रहा है। तभी अचानक पास के बिजली खंभे से जुड़ा एक तार टूटकर सीधे भैंस पर गिर पड़ा। करंट लगते ही भैंस ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह हादसा इतना अचानक हुआ कि हनुमंत लोधी को कुछ समझने का भी मौका नहीं मिला।
हनुमंत लोधी के लिए यह केवल एक पशु की मौत नहीं, बल्कि उनकी आजीविका पर गहरा प्रहार है। उन्होंने बताया कि यह भैंस उनके परिवार के पालन-पोषण का मुख्य साधन थी। दूध बेचकर ही वे अपने घर का खर्च चलाते थे। इस हादसे के बाद उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने घटना की सूचना तुरंत मालथौन पुलिस को दी और प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।

इस घटना के बाद ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव और आसपास के खेतों में कई जगह बिजली के तार लंबे समय से ढीले और झूलते हुए हैं। कई बार इनकी शिकायत संबंधित विभाग से की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि विभाग की लापरवाही और अनदेखी के कारण ही इस तरह के हादसे बार-बार हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि बरसात और आंधी के समय यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है। कमजोर और जर्जर तार कभी भी टूटकर गिर सकते हैं, जिससे न केवल पशुओं बल्कि इंसानों की जान भी खतरे में पड़ जाती है। भेलैया गांव की इस घटना ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है कि कहीं अगला शिकार कोई इंसान न बन जाए।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और बिजली विभाग से मांग की है कि गांव में लगे सभी बिजली के तारों की तत्काल जांच कराई जाए। जो तार ढीले या खराब स्थिति में हैं, उन्हें तुरंत बदला जाए और नियमित रूप से उनकी देखरेख की जाए। इसके अलावा, उन्होंने यह भी मांग की है कि पीड़ित पशुपालक को उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि वह अपने नुकसान की भरपाई कर सके।
यह घटना केवल एक गांव या एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर इस तरह की समस्याएं नजरअंदाज कर दी जाती हैं, जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए। बिजली जैसी बुनियादी सुविधा का सुरक्षित और व्यवस्थित होना बेहद जरूरी है, लेकिन जब इसकी देखरेख में लापरवाही बरती जाती है, तो इसके परिणाम बेहद घातक हो सकते हैं।
सरकार और प्रशासन को चाहिए कि इस घटना को गंभीरता से लेते हुए न केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे, बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम भी उठाए। नियमित निरीक्षण, समय पर मरम्मत और जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी है, ताकि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
अंततः यह कहा जा सकता है कि भेलैया गांव की यह घटना एक चेतावनी है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इससे भी बड़े और गंभीर हादसे हो सकते हैं, जिनकी भरपाई संभव नहीं होगी।