बीना में किसानों का उग्र प्रदर्शन: खरीदी केंद्रों की अव्यवस्थाओं के खिलाफ मुख्यमंत्री का पुतला जलाने पहुंचे किसान, पुलिस ने रोका !

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बीना में शुक्रवार को समर्थन मूल्य खरीदी केंद्रों की अव्यवस्थाओं को लेकर किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले बड़ी संख्या में किसानों ने प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री का पुतला जलाने का प्रयास किया। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए पुतला जलाने से पहले ही उसे कब्जे में ले लिया। इसके बाद किसानों ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया और अपनी मांगों को लेकर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

किसानों का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर भारी अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं, लेकिन प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा। यही वजह है कि मजबूर होकर किसानों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

बताया जा रहा है कि किसानों ने गुरुवार से ही बीना ब्लॉक के बिहरना स्थित स्टेट वेयर हाउस में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था। यह धरना समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी केंद्रों में हो रही गड़बड़ियों, धीमी खरीदी प्रक्रिया और प्रशासनिक लापरवाही के विरोध में किया जा रहा है।

धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने कहा कि कई दिनों से वे अपनी उपज लेकर खरीदी केंद्रों पर पड़े हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। किसानों का कहना है कि खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं होने से उन्हें खुले आसमान के नीचे दिन-रात गुजारने पड़ रहे हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा के संभागीय अध्यक्ष सीताराम ठाकुर ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीना क्षेत्र के खरीदी केंद्रों पर सप्ताह में केवल दो दिन ही खरीदी की जा रही है। इससे किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं और उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिन दो दिनों में खरीदी होती भी है, उन दिनों बारदाना यानी बोरे खत्म हो जाते हैं। इसके कारण किसानों को अपनी उपज तौल कराने के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई किसान पिछले आठ-दस दिनों से केंद्रों पर ही डेरा डाले हुए हैं।

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि खरीदी केंद्रों पर मूलभूत सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। वहां पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है, न ही किसानों के बैठने के लिए छांव की व्यवस्था की गई है। शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं, जिससे विशेष रूप से बुजुर्ग किसानों और महिलाओं को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि जिन किसानों की उपज की तौल हो चुकी है, उनकी फीडिंग समय पर नहीं की जा रही। इसके कारण रिकॉर्ड में खरीदी दर्ज नहीं हो पाती और किसानों को बार-बार केंद्रों पर बुलाया जाता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।

किसानों ने खरीदी केंद्रों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उनका कहना है कि कई जगह किसानों से प्रति क्विंटल 100 से 180 रुपए तक की अवैध वसूली की जा रही है। किसानों का आरोप है कि बिना पैसे दिए उनकी उपज की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाती।

धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कहा कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।

एक अन्य बड़ी समस्या परिवहन को लेकर भी सामने आई है। किसानों का कहना है कि खरीदी के बाद अनाज का समय पर परिवहन नहीं हो रहा, जिसके कारण केंद्रों पर गेहूं खुले में पड़ा हुआ है। हाल ही में हुई बेमौसम बारिश से कई जगह अनाज भीग गया और खराब होने लगा है।

किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। समय पर परिवहन नहीं होने के कारण भुगतान प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। किसानों को कई-कई दिनों तक भुगतान का इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि उन्हें खेती के अगले कार्यों के लिए तुरंत पैसों की जरूरत होती है।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल भी बड़ी संख्या में तैनात रहा। जब किसानों ने मुख्यमंत्री का पुतला जलाने की कोशिश की, तब पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए पुतला जब्त कर लिया। इस दौरान कुछ देर के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी बनी रही, हालांकि बाद में मामला शांत हो गया।

इसके बाद किसान तहसील कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने तहसीलदार अंबर पंथी को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसानों ने खरीदी केंद्रों की समस्याओं को विस्तार से बताया और तत्काल सुधार की मांग की।

किसानों ने मांग की कि खरीदी केंद्रों पर नियमित रूप से खरीदी की जाए, पर्याप्त मात्रा में बारदाना उपलब्ध कराया जाए, किसानों के लिए पानी और छांव जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं तथा भ्रष्टाचार में शामिल कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए।

संयुक्त किसान मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। किसान नेताओं का कहना है कि वे अपने हक की लड़ाई के लिए पीछे नहीं हटेंगे।

वहीं प्रशासन का कहना है कि किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और खरीदी केंद्रों की व्यवस्थाओं को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया है कि जल्द ही समस्याओं का समाधान किया जाएगा।

बीना क्षेत्र में किसानों का यह आंदोलन अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। खरीदी व्यवस्था को लेकर लगातार उठ रहे सवाल सरकार और प्रशासन के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं।

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