वृंदावनग्राम ग्राम देहरी में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक विशेष किसान चौपाल का आयोजन किया गया। इस आयोजन में कृषि एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने किसानों को शासन की विभिन्न योजनाओं, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा उन्नत खेती के तरीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्राम के किसान उपस्थित रहे और उन्होंने खेती से जुड़ी समस्याओं एवं सुझावों को अधिकारियों के समक्ष रखा।

किसान चौपाल में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवधेश राय, उद्यानिकी विभाग एवं पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी सहित ग्राम पंचायत के सरपंच और क्षेत्र के किसान शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों से जोड़ना, सरकारी योजनाओं की जानकारी देना तथा खेती को अधिक लाभकारी बनाना रहा।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने किसानों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याएं सुनीं। किसानों ने खाद-बीज की उपलब्धता, सिंचाई, फसल सुरक्षा तथा पशुपालन से संबंधित कई मुद्दे उठाए, जिन पर अधिकारियों ने विस्तार से चर्चा करते हुए समाधान संबंधी सुझाव दिए। अधिकारियों ने किसानों को आश्वस्त किया कि कृषि विभाग द्वारा किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

चौपाल में किसानों को ई-टोकन प्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि यह व्यवस्था किसानों को खाद, बीज एवं अन्य कृषि सेवाओं की प्राप्ति में पारदर्शिता और सुविधा प्रदान करती है। ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से किसानों को लंबी कतारों और अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलती है।
विशेष बात यह रही कि कार्यक्रम के दौरान कई किसानों के मोबाइल फोन के माध्यम से मौके पर ही ई-टोकन अपलोड किए गए। अधिकारियों ने किसानों को पूरी प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि मोबाइल के जरिए किस प्रकार ई-टोकन प्राप्त किया जा सकता है और उसका उपयोग कैसे किया जाता है। इससे किसानों में डिजिटल व्यवस्था के प्रति जागरूकता बढ़ी और उन्हें तकनीक का व्यवहारिक अनुभव भी मिला।
किसान चौपाल में इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (IFS) यानी एकीकृत कृषि प्रणाली के महत्व पर भी विशेष चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान समय में केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने के बजाय खेती के साथ पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को जोड़ना आवश्यक हो गया है। इससे किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित होते हैं और जोखिम भी कम होता है।
अधिकारियों ने किसानों को समझाया कि आईएफएस मॉडल अपनाने से कम संसाधनों में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही खेत की उर्वरता बनाए रखने, जैविक उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने में भी यह प्रणाली काफी उपयोगी साबित होती है।

इस दौरान ग्राम के किसान मुन्ना पटेल के खेत का उदाहरण प्रस्तुत किया गया, जहां आईएफएस योजना के अंतर्गत सफलतापूर्वक कार्य किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि मुन्ना पटेल ने खेती के साथ पशुपालन एवं अन्य गतिविधियों को जोड़कर बेहतर आय अर्जित की है और उनका मॉडल अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।
अधिकारियों ने किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के लाभों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है, जबकि जैविक खेती मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होती है। किसानों को गोबर खाद, जीवामृत एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने कृषि विभाग द्वारा दी गई जानकारी को उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार की चौपालें गांव स्तर पर लगातार आयोजित की जानी चाहिए, ताकि किसानों को नई योजनाओं और तकनीकों की जानकारी समय पर मिल सके।
किसान चौपाल के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, डिजिटल सेवाओं एवं आय बढ़ाने के नए विकल्पों से जोड़ने का प्रयास किया गया। अधिकारियों ने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि को लाभकारी बनाने के उद्देश्य से लगातार कार्य कर रही है, जिसके लिए किसानों का जागरूक और तकनीकी रूप से सक्षम होना बेहद जरूरी है।